पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने मौजूदा मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के जोधपुर में दिए गए बयानों पर तीखा पलटवार किया है। गहलोत ने मुख्यमंत्री से उनके खिलाफ लगाए गए आरोपों के समर्थन में सार्वजनिक रूप से सबूत पेश करने की मांग की है। साथ ही चेतावनी दी है कि यदि 24 घंटे के भीतर सबूत नहीं दिए गए, तो मुख्यमंत्री माफी मांगें।
यह विवाद मंगलवार को जोधपुर में मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा द्वारा दिए गए उस संबोधन के बाद शुरू हुआ, जिसमें उन्होंने पूर्व सीएम पर किसानों को लूटने और नकली खाद-बीज बेचने जैसे संगीन आरोप लगाए थे। गहलोत ने इन बयानों को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि बिना किसी आधार के गढ़ी गई कहानियां जनता को गुमराह करने और वास्तविक मुद्दों से ध्यान भटकाने का प्रयास हैं।
व्यक्तिगत आरोपों और भाषा की मर्यादा पर सवाल
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर सिलसिलेवार पोस्ट साझा करते हुए पूर्व मुख्यमंत्री ने लिखा कि इन आधारहीन बातों से उन्हें गहरी ठेस पहुंची है। गहलोत ने आरोप लगाया कि अपराधबोध के दबाव में आकर मुख्यमंत्री अपनी भाषा की गरिमा भूल गए हैं और व्यक्तिगत स्तर पर झूठे आरोप लगाने लगे हैं।
उन्होंने चुनौती देते हुए कहा कि मुख्यमंत्री अपने दावों से जुड़े दस्तावेज और विवरण न केवल उन्हें उपलब्ध कराएं, बल्कि प्रदेश की जनता के सामने भी रखें।
शिखर अग्रवाल प्रकरण पर सीएम की भूमिका को लेकर घेरा
पूर्व मुख्यमंत्री ने विला खरीद विवाद से जुड़े आईएएस अधिकारी शिखर अग्रवाल का जिक्र करते हुए सरकार पर गंभीर सवाल खड़े किए। गहलोत ने कहा कि उन्हें उम्मीद थी कि मुख्यमंत्री इस मामले में अपनी सरकार का पक्ष रखेंगे और सार्वजनिक रूप से सच्चाई बताएंगे।
उन्होंने याद दिलाया कि जिस बोर्ड की बैठक में 'अनंता कंपनी' को विशेष छूट देने का निर्णय लिया गया था, उसके अध्यक्ष खुद मुख्यमंत्री होते हैं। ऐसे में इस प्रकरण पर मुख्यमंत्री की संदिग्ध भूमिका पर पर्दा डालने की कोशिश की जा रही है।
एसीबी के बजाय सीबीआई जांच की मांग
मामले की जांच को लेकर पूर्व सीएम ने एक बार फिर केंद्रीय एजेंसी से पड़ताल कराने की वकालत की है। गहलोत ने कहा- "मुख्यमंत्रीजी, सवाल अब भी वही है। आखिर इस मामले की जांच आप अपने अधीन एजेंसी एसीबी की बजाय केंद्रीय एजेंसी सीबीआई को क्यों नहीं सौंप रहे?"
डोटासरा बोले- 3 साल तक क्यों मौन रहे मुख्यमंत्री?
इस पूरे घटनाक्रम के बीच कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने भी सरकार पर निशाना साधा है। डोटासरा ने एक्स पर लिखा कि जब सरकार और मुख्यमंत्री कार्यालय से जुड़े अधिकारियों पर सवाल उठते हैं, तो जवाबदेही भी वहीं से तय होनी चाहिए।
पीसीसी चीफ ने सवाल उठाया कि यदि सरकार के पास पूर्व मुख्यमंत्री के खिलाफ इतने गंभीर मामलों से जुड़े साक्ष्य थे, तो पिछले तीन साल तक प्रशासन क्यों खामोश बैठा रहा? उन्होंने कहा कि जब जांच की आंच सीधे मुख्यमंत्री कार्यालय तक पहुंचने लगी, तब अचानक इस तरह के नए आरोप उछालकर ध्यान भटकाने की रणनीति अपनाई जा रही है।
डोटासरा ने कहा कि सरकार के पास पूरी मशीनरी और ताकत है, इसलिए व्यक्तिगत टिप्पणियां करने के बजाय तथ्यों के आधार पर पारदर्शी कार्रवाई की जानी चाहिए।
