शहरी निकाय चुनाव में भरतपुर और डीग जिलों में कांग्रेस का खाता तक नहीं खुलने के बाद पार्टी के भीतर कलह खुलकर सामने आ गई है। पूर्व मंत्री विश्वेंद्र सिंह ने हार का ठीकरा प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा और दोनों जिलों के जिलाध्यक्षों पर फोड़ा है। उन्होंने पार्टी नेतृत्व पर गंभीर सवाल उठाते हुए सीधे तौर पर इसे मनमाने टिकट वितरण का नतीजा बताया है।
आगामी पंचायतीराज चुनावों से ठीक पहले उठे इस राजनीतिक भूचाल ने कांग्रेस की गुटबाजी को एक बार फिर सतह पर ला दिया है। विश्वेंद्र सिंह ने सोशल मीडिया और एक साक्षात्कार के जरिए प्रदेश अध्यक्ष और स्थानीय नेतृत्व के खिलाफ आक्रामक तेवर अपनाए हैं।
कार्यकर्ताओं की अनदेखी और टिकट बंटवारे पर सवाल
विश्वेंद्र सिंह ने अपनी प्रतिक्रिया में साफ कहा कि भरतपुर और डीग में कांग्रेस के इस प्रदर्शन के लिए पूरी तरह से स्थानीय जिलाध्यक्ष और प्रदेश नेतृत्व जिम्मेदार हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि पार्टी के निष्ठावान कार्यकर्ताओं को दरकिनार कर चहेतों को टिकट बांटे गए, जिसकी वजह से जनता ने निकाय चुनावों में कांग्रेस को नकार दिया।
विश्वेंद्र सिंह ने कहा- "प्रदेश अध्यक्ष मूक-बधिर बने बैठे हैं। दोनों जिलाध्यक्षों ने अपने चहेतों को टिकट देकर पार्टी को डुबो दिया है और डोटासरा ने इन्हें बचाया है।"
उन्होंने डोटासरा के पुराने बयानों का जिक्र करते हुए आरोप लगाया कि प्रदेश अध्यक्ष की भरतपुर के प्रति सोच कभी सकारात्मक नहीं रही है। पूर्व मंत्री के इन बयानों के बाद पार्टी के भीतर डोटासरा विरोधी खेमा पूरी तरह सक्रिय नजर आ रहा है।
"मैं कहीं नहीं जा रहा, कांग्रेस में ही रहूंगा"
बगावती तेवर दिखाने के साथ ही विश्वेंद्र सिंह ने उन अटकलों पर भी विराम लगा दिया जिनमें उनके पार्टी छोड़ने या बीजेपी में शामिल होने की चर्चाएं चल रही थीं। उन्होंने स्पष्ट किया कि उनका यह मुखर होना पार्टी की मजबूती के लिए है।
विश्वेंद्र सिंह ने बातचीत में कहा- "कोई यह गलतफहमी न पाले कि मैं बीजेपी में जा रहा हूं। मैं कहीं नहीं जा रहा, कांग्रेस में ही रहूंगा और पार्टी हित में अपनी आवाज उठाता रहूंगा।"
पूर्व मंत्री ने डोटासरा को भरतपुर आने की चुनौती भी दी है। उन्होंने 2013 के एक राजनीतिक संस्मरण का हवाला देते हुए कहा कि यदि प्रदेश अध्यक्ष भरतपुर आने की हिम्मत जुटाते हैं, तो उनका वही स्वागत किया जाएगा जो पूर्व प्रदेशाध्यक्ष डॉ. चंद्रभान का हुआ था। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह बयान दोनों नेताओं के बीच लंबे समय से चली आ रही तनातनी को और हवा दे रहा है।
पंचायतीराज चुनाव से पहले बढ़ी सियासी सरगर्मी
भरतपुर और डीग में कांग्रेस के शून्य पर सिमटने और उसके बाद वरिष्ठ नेता के इस खुले हमले ने पार्टी की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। राज्य में अब पंचायतीराज चुनाव नजदीक हैं, ऐसे में यह आपसी खींचतान कांग्रेस के लिए ग्रामीण इलाकों में भारी पड़ सकती है।
राजनीतिक जानकारों का कहना है कि यह सिर्फ निकाय चुनाव की हार का मामला नहीं है, बल्कि राजस्थान कांग्रेस में अंदरूनी वर्चस्व की लड़ाई का एक नया अध्याय है। डोटासरा विरोधी खेमा इस मौके का इस्तेमाल नेतृत्व पर दबाव बनाने के लिए कर रहा है, जिससे आने वाले दिनों में पार्टी के भीतर घमासान और तेज होने के आसार हैं।
