गणेश उत्सव के समापन के बाद शनिवार दोपहर से बुरहानपुर में पंडालों में विराजित गणेश प्रतिमाओं का विसर्जन चल समारोह शुरू हो गया। शहर के अलग-अलग पंडालों से बप्पा की प्रतिमाएं पारंपरिक वाद्ययंत्रों और जयकारों के साथ निकलकर गांधी चौक पहुंचीं। इस दौरान शहर की सड़कों पर भारी भीड़ और उत्साह का माहौल नजर आया।
18 से 28 फीट तक की भव्य प्रतिमाएं
शहर की संकरी गलियों से लेकर मुख्य मार्गों तक निकली इन विशाल प्रतिमाओं ने लोगों का ध्यान खींचा। चल समारोह में 18 फीट से लेकर 25 और 28 फीट तक ऊंची गणेश प्रतिमाएं आकर्षण का केंद्र बनीं। भव्य साज-सज्जा और विभिन्न स्वरूपों में सजे बप्पा के दर्शन के लिए दोपहर से ही बड़ी संख्या में श्रद्धालु सड़कों और चौराहों पर जुट गए थे।
इससे पहले शुक्रवार को सनातन परंपरा के अनुसार घरों में विराजित गणेश प्रतिमाओं का श्रद्धालुओं ने नम आंखों के साथ विसर्जन किया था। इसके अगले चरण में शनिवार को सार्वजनिक पंडालों की प्रतिमाओं को विसर्जन के लिए रवाना किया गया।
अखाड़ों का प्रदर्शन और अलग-अलग धार्मिक स्वरूप
चल समारोह के दौरान गणेश जी के कई अनूठे धार्मिक स्वरूप देखने को मिले। कुछ झांकियों में बप्पा भगवान विष्णु और हनुमान के रूप में नजर आए, तो कहीं भगवान शिव की पूजा करते हुए दिखाई दिए। केदारनाथ धाम की सेवा करते हुए गणेश जी का स्वरूप भी श्रद्धालुओं के बीच मुख्य आकर्षण रहा।
ढोल-ताशों की गूंज के बीच श्रद्धालुओं ने जमकर नृत्य किया और कई अखाड़ों के कलाकारों ने लेझिम की धुन पर अपने कला कौशल का प्रदर्शन किया। हालांकि, प्रशासन के प्रतिबंध के बावजूद कुछ स्थानों पर डीजे का इस्तेमाल भी होता दिखाई दिया।
गांधी चौक पर जमावड़ा और आगे की प्रक्रिया
दोपहर से शुरू हुआ यह चल समारोह अपने तय मार्गों से होता हुआ गांधी चौक पहुंचा, जहां बड़ी संख्या में लोग बप्पा की विदाई के साक्षी बने। प्रशासन और आयोजन समितियों के मुताबिक, शनिवार देर रात तक विसर्जन का यह सिलसिला जारी रहने की उम्मीद है। बड़ी प्रतिमाओं के आकार और संख्या को देखते हुए विसर्जन की यह प्रक्रिया रविवार तक भी खिंच सकती है।
