एक ही खेत का 4 बार बीमा, 31 लाख का क्लेम! सूरतगढ़ में PM फसल बीमा योजना में बड़ा फर्जीवाड़ा
श्रीगंगानगर: प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना में राजस्थान के श्रीगंगानगर जिले के सूरतगढ़ से कथित फर्जीवाड़े का बड़ा मामला सामने आया है। कालूसर गांव में एक ही खेत और एक ही मूंगफली की फसल पर चार अलग-अलग बीमा पॉलिसियों के जरिए कुल 31 लाख 15 हजार 514 रुपये का क्लेम खातों में पहुंचने का मामला सामने आया है। मामले में कृषि विभाग ने जांच शुरू कर दी है और संबंधित किसानों, CSC/e-मित्र संचालकों तथा बीमा कंपनी से जुड़े लोगों की भूमिका जांच के दायरे में है।
मामला खसरा नंबर 281/91 की 10.37 हेक्टेयर यानी करीब 40 बीघा जमीन का है। यह जमीन किसान बनवारी लाल के नाम बताई गई है। खरीफ 2025 में इस जमीन पर मूंगफली की फसल का बीमा कराया गया था। इसके बाद उसी जमीन और फसल के लिए अलग-अलग माध्यमों से अन्य बीमा आवेदन किए गए।
एक जमीन, चार पॉलिसियां और 31 लाख का क्लेम
जांच के अनुसार, बनवारी लाल के नाम से एक पॉलिसी के बाद उसी 10.37 हेक्टेयर जमीन पर CSC संचालक के माध्यम से दूसरी पॉलिसी बनाई गई। इसके बाद एक अन्य CSC संचालक के जरिए करीब 10.30 हेक्टेयर क्षेत्र के लिए तीसरा आवेदन किया गया। इन पॉलिसियों में फसल खराब होने का दावा किया गया और कुल 23 लाख 35 हजार 319 रुपये का क्लेम प्राप्त हुआ।
मामले में चौथी पॉलिसी भी इसी जमीन की सामने आई। जमीन बटाई पर दिए जाने के बाद बटाईदार रिछपाल ने भी 10.37 हेक्टेयर जमीन पर मूंगफली की फसल का बीमा कराया। फसल खराबे के नाम पर उसके खाते से जुड़े क्लेम में 7 लाख 80 हजार 195 रुपये की राशि सामने आई। इस तरह चार पॉलिसियों से कुल राशि 31,15,514 रुपये पहुंच गई।
एक ही खसरे पर सात आवेदन
जांच में यह भी सामने आया कि एक ही खसरा नंबर पर कुल सात बार बीमा आवेदन किए गए थे। इनमें से चार आवेदन क्लेम तक पहुंचे। रिपोर्ट के मुताबिक शुरुआती आवेदनों में कुछ आपत्तियां और रिजेक्शन सामने आए, लेकिन बाद में किए गए कुछ आवेदन आगे बढ़कर ऑटो-अप्रूवल प्रक्रिया के जरिए मंजूर हो गए। यही प्रक्रिया अब जांच का अहम हिस्सा है।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब जमीन का खसरा नंबर और रकबा रिकॉर्ड में मौजूद था, तो एक ही जमीन पर कई बीमा पॉलिसियां बनने और फिर क्लेम मंजूर होने की स्थिति कैसे बनी।
CSC संचालकों और बीमा कंपनी की भूमिका भी जांच के घेरे में
मामले में कृषि विभाग यह जांच कर रहा है कि अलग-अलग CSC/e-मित्र केंद्रों से एक ही जमीन के लिए कई आवेदन कैसे किए गए और उनकी जांच किस स्तर पर हुई। बीमा कंपनी की पॉलिसी जांच, स्वीकृति और क्लेम भुगतान की प्रक्रिया भी जांच के दायरे में है।
श्रीगंगानगर का मामला सामने आने के बाद राजस्थान में एक ही जमीन पर कई पॉलिसियां बनाए जाने की शिकायतों की जांच की जा रही है। विभाग खसरा नंबर, जमीन का रकबा, किसान की पात्रता और बीमा पॉलिसियों का मिलान कर रहा है।
राजस्थान के दूसरे जिलों में भी सामने आई गड़बड़ी
यह मामला अकेला नहीं बताया जा रहा है। राजस्थान के टोंक की मालपुरा तहसील और जयपुर की शाहपुरा तहसील में भी PM फसल बीमा योजना से जुड़े फर्जी बीमा के मामले सामने आए हैं। कृषि विभाग ने संबंधित लोगों के खिलाफ FIR की कार्रवाई शुरू की है।
प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना का आधिकारिक पोर्टल किसानों को पॉलिसी स्टेटस देखने और आवेदन से जुड़ी जानकारी की सुविधा देता है। पोर्टल पर Multiple PMFBY Applications की निगरानी के लिए डिजिटल टूल भी उपलब्ध है।
नोट: 31.15 लाख रुपये के क्लेम और चार पॉलिसियों का मामला रिपोर्टों में सामने आया है। इसे अंतिम रूप से “फर्जीवाड़ा” या आपराधिक धोखाधड़ी साबित मानने के बजाय जांच में सामने आया कथित फर्जी क्लेम/अनियमितता कहना अधिक सटीक होगा, जब तक जांच और कानूनी कार्रवाई का अंतिम निष्कर्ष सामने नहीं आता।
