देवरी नगर में डीएपी और यूरिया खाद की कथित कालाबाजारी का मामला सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो के बाद तूल पकड़ता जा रहा है। क्षेत्र के किसान आशीष कोष्टी द्वारा लगातार खाद की कालाबाजारी रोकने और किसानों को निर्धारित मूल्य पर खाद उपलब्ध कराने की मांग को लेकर आवाज उठाई जा रही थी। उनके द्वारा बनाए गए कई वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद आखिरकार कृषि विभाग ने कार्रवाई करते हुए जवाहर वार्ड स्थित एक निजी गोदाम को सील कर दिया।किसान आशीष कोष्टी का आरोप है कि देवरी नगर के मुआर रोड स्थित अरिहंत फर्टिलाइजर्स की दुकान से किसानों को यूरिया और डीएपी निर्धारित दर से अधिक कीमत पर बेचे जाने की जानकारी उन्हें मिली थी। इसके बाद उन्होंने मौके पर पहुंचकर यूरिया की दो बोरियां कथित तौर पर 600 रुपये प्रति बोरी की दर से खरीदीं और इसकी राशि दुकान संचालक को दी।इसके बाद आशीष कोष्टी द्वारा अरिहंत फर्टिलाइजर्स से जुड़े निजी गोदाम से बड़ी मात्रा में यूरिया और डीएपी की बोरियों को छोटा हाथी वाहन के माध्यम से इधर-उधर ले जाने के वीडियो बनाए गए। किसान का दावा है कि लगातार दो-तीन दिनों तक इस तरह खाद की बोरियों को ले जाने के वीडियो सामने आए, जिन्हें उन्होंने सोशल मीडिया पर वायरल किया।
वायरल वीडियो के बाद हरकत में आया विभाग
सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल होने के बाद कृषि विभाग और राजस्व अधिकारियों की टीम पुलिस की मौजूदगी में देवरी नगर के जवाहर वार्ड स्थित निजी गोदाम पहुंची। यहां जांच के दौरान 100 बोरी डीएपी और 12 बोरी यूरिया जब्त की गई। इसके बाद संबंधित गोदाम को सील कर दिया गया।इस कार्रवाई में कृषि विभाग के एसडीओ उमाशंकर प्रजापति, नायब तहसीलदार रामराज चौधरी, कृषि विभाग के अधिकारी कमल खतरे, सुनील बिरला और सुनील खटीक सहित अन्य अधिकारी-कर्मचारी मौजूद रहे।
किसानों के बीच उठ रहे कई सवाल
खाद की किल्लत के बीच बड़ी मात्रा में डीएपी और यूरिया एक निजी गोदाम में पाए जाने के बाद किसानों के बीच कई सवाल खड़े हो रहे हैं। किसानों का कहना है कि जब उन्हें यूरिया और डीएपी के लिए परेशान होना पड़ रहा है, तो कुछ व्यापारियों के निजी गोदामों में बड़ी मात्रा में खाद कैसे पहुंच रही है?वहीं किसान आशीष कोष्टी का कहना है कि यदि उनके द्वारा लगातार सोशल मीडिया के माध्यम से खाद की कथित कालाबाजारी और भंडारण का मुद्दा नहीं उठाया जाता, तो क्या विभागीय अमला इतनी जल्दी कार्रवाई करता? किसानों का सवाल है कि खाद की उपलब्धता, भंडारण और बिक्री की निगरानी की जिम्मेदारी संबंधित विभागीय अधिकारियों की भी है, तो फिर किसानों को खाद के लिए भटकने की स्थिति क्यों बन रही है?अब कार्रवाई के बाद यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि कृषि विभाग की जांच में खाद के भंडारण और बिक्री को लेकर क्या स्थिति सामने आती है और यदि नियमों का उल्लंघन पाया जाता है तो संबंधित जिम्मेदारों पर क्या कार्रवाई की जाती है।
किसान की शिकायत और वायरल वीडियो के बाद खाद गोदाम सील
मध्य प्रदेश
