शाजापुर जिले के मक्सी-पीर उमरोद रेलखंड पर गोवा एक्सप्रेस की चपेट में आने से दो रेलकर्मियों की मौत के मामले में तूल पकड़ता जा रहा है। बेरछा इंजीनियरिंग विभाग के कर्मचारियों ने रतलाम मंडल रेल प्रबंधक को ज्ञापन सौंपकर हादसे की उच्चस्तरीय और निष्पक्ष जांच कराए जाने की मांग उठाई है। ज्ञापन में आरोप लगाया गया है कि घटना के वक्त ट्रैक पर ट्रॉली चढ़ाने के लिए दबाव बनाया गया था।
क्या है पूरा मामला
यह हादसा 16 अक्टूबर 2026 को मक्सी-पीर उमरोद रेलखंड पर हुआ था। ट्रैक निरीक्षण के दौरान रेलवे ट्रॉली गोवा एक्सप्रेस (ट्रेन संख्या 12780) की चपेट में आ गई, जिससे मौके पर मौजूद दो रेलकर्मियों की जान चली गई।
कर्मचारियों की ओर से सौंपे गए ज्ञापन के मुताबिक, दुर्घटना के समय ट्रॉली पर पीडब्ल्यूआई (PWI) और सीपीपीडब्ल्यूआई (CPWI) समेत कई अन्य कर्मचारी भी सवार थे। बेरछा के सीपीपीडब्ल्यूआई सत्य प्रकाश जैन पर आरोप लगाया गया है कि उन्होंने ही ट्रॉली को डाउन लाइन पर उतारने के लिए कथित तौर पर दबाव बनाया था। हालांकि, इन गंभीर आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि होना अभी बाकी है।
सुरक्षा नियमों और बयानों की मांग
रेलवे कर्मचारियों ने मंडल रेल प्रबंधक से मांग की है कि ट्रैक निरीक्षण और ट्रॉली संचालन के दौरान सुरक्षा मानकों का कितना पालन हुआ, इसकी गहराई से जांच की जाए। ज्ञापन में यह भी कहा गया है कि हादसे से जुड़े सभी कर्मचारियों और अधिकारियों के बयान दर्ज किए जाएं और साक्ष्यों के आधार पर दोषी पाए जाने वालों पर कार्रवाई हो।
इसके साथ ही, मृतकों के आश्रित परिजनों को रेलवे के नियमों के तहत आर्थिक सहायता और अन्य लाभ जल्द से जल्द दिए जाने की बात कही गई है। कर्मचारियों ने यह भी मांग रखी है कि जांच की हर अपडेट से उन्हें लिखित रूप से अवगत कराया जाए।
अब सबकी निगाहें रेलवे प्रशासन की औपचारिक जांच और आगे की कार्रवाई पर टिकी हैं। हादसे के असल कारणों और जवाबदेही का पर्दाफाश जांच पूरी होने के बाद ही सामने आ सकेगा।
