सावन महीने के कृष्ण पक्ष की अमावस्या तिथि को हरियाली अमावस्या के रूप में मनाया जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन स्नान, दान और तर्पण के साथ पौधे लगाना और उनकी पूजा करना बेहद खास माना जाता है। इस साल हरियाली अमावस्या पर शिव-पार्वती की आराधना के साथ विशेष उपायों से जीवन के कष्ट दूर किए जा सकते हैं।
शिव-पार्वती पूजन और मनोकामनाएं
हरियाली अमावस्या के दिन भगवान शिव और माता पार्वती की विधिवत पूजा करने से भक्तों की मनोकामनाएं पूरी होती हैं। कुंवारी कन्याएं इस दिन सुयोग्य वर की प्राप्ति के लिए व्रत और पूजन करती हैं, जबकि सुहागन महिलाएं अखंड सौभाग्य के लिए यह अनुष्ठान करती हैं।
कुंडली में पितृ दोष, कालसर्प दोष या शनि के प्रकोप से पीड़ित लोगों के लिए यह दिन खास राहत देने वाला माना जाता है। इस तिथि पर शिवलिंग का जलाभिषेक, पंचामृत स्नान या रुद्राभिषेक करने से विशेष फल की प्राप्ति होती है।
मनोकामना के अनुसार लगाएं पौधे
पुराणों में हरियाली अमावस्या पर वृक्षारोपण को अक्षय पुण्य देने वाला बताया गया है। व्यक्ति अपनी जरूरत और इच्छा के अनुसार पौधे चुनकर लगा सकता है:
- नीम का पौधा: अच्छी सेहत और आरोग्यता की प्राप्ति के लिए नीम लगाना उत्तम माना जाता है।
- केले का पौधा: संतान सुख की कामना के लिए केले का पेड़ लगाना शुभ होता है।
- तुलसी और आंवला: घर में सुख-शांति और समृद्धि के लिए तुलसी, जबकि धन और वैभव के लिए आंवले का पौधा लगाया जाता है।
- पीपल और वटवृक्ष: पीपल लगाने से पितृ दोष शांत होता है और लक्ष्मी की कृपा बनी रहती है। वहीं, वटवृक्ष को मोक्ष और आरोग्यता का प्रतीक माना गया है।
- अशोक और अर्जुन: जीवन के सभी शोक दूर करने के लिए अशोक और सौभाग्य प्राप्ति के लिए अर्जुन या नारियल का पेड़ लगाना फलदायी है।
पितृ दोष से मुक्ति के उपाय
पितरों की आत्मा की शांति और पितृ दोष से मुक्ति पाने के लिए हरियाली अमावस्या को सबसे उत्तम तिथि माना गया है। इस दिन तर्पण, श्राद्ध और हवन जैसे अनुष्ठान करने से पितृ तृप्त होते हैं और परिवार पर उनकी कृपा बनी रहती है।
