कांग्रेस नेता राहुल गांधी के 'छात्रों से गूंज' कार्यक्रम के दौरान इंदौर में एक मिमिक्री आर्टिस्ट द्वारा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का मजाक उड़ाए जाने का मामला तूल पकड़ गया है। कार्यक्रम के मंच पर मिमिक्री आर्टिस्ट पुलकित मनी ने पीएम मोदी की एक रैली का संदर्भ देते हुए एक बुजुर्ग महिला के लिए कुर्सी मांगे जाने की घटना की नकल उतारी, जिस पर राहुल गांधी मंच पर मौजूद नजर आए। इस वाकये के सामने आने के बाद भारतीय जनता पार्टी ने राहुल गांधी पर संवैधानिक पद की गरिमा और राजनीतिक शिष्टाचार को ताक पर रखने का गंभीर आरोप लगाया है।
इंदौर के मंच पर क्या हुआ था?
कोटा से शुरू हुए राहुल गांधी के देशव्यापी 'छात्रों से गूंज' संवाद कार्यक्रम का मकसद युवाओं के बीच अपनी राजनीतिक जमीन मजबूत करना और नीट पेपर लीक जैसे मुद्दों को उठाना है। इसी कड़ी में इंदौर में आयोजित कार्यक्रम के दौरान मंच पर पहुंचे मिमिक्री आर्टिस्ट पुलकित मनी ने एक जनसभा में बुजुर्ग महिला को कुर्सी उपलब्ध कराने के पीएम मोदी के आग्रह को व्यंग्यात्मक ढंग से पेश किया। मंच पर मौजूद राहुल गांधी ने इस प्रस्तुति के दौरान आपत्ति जताने के बजाय कलाकार को गले लगाया, जिसके बाद राजनीतिक गलियारों में इसकी तीखी आलोचना शुरू हो गई है।
"संवैधानिक पद पर बैठे देश के प्रधानमंत्री के प्रति ऐसा अमर्यादित आचरण न केवल व्यक्तिगत गरिमा के खिलाफ है, बल्कि लोकतंत्र की बुनियादी परंपराओं को भी तार-तार करता है।"
बीजेपी का तीखा हमला और राजनीतिक गलियारों में चर्चा
घटना के तूल पकड़ने के बाद बीजेपी नेताओं ने राहुल गांधी की मौजूदगी और उनकी प्रतिक्रिया को लेकर सवाल खड़े किए हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि किसी गैर-राजनीतिक या छात्र मंच पर ऐसा आचरण सामने आता है, तो एक जिम्मेदार पद पर बैठे नेता से यह अपेक्षा की जाती है कि वे तुरंत आपत्ति दर्ज कराएं। राहुल गांधी द्वारा कलाकार की इस हरकत को रोकने के बजाय उसे प्रोत्साहित करने वाले अंदाज में गले लगाने से यह संदेश गया है कि ऐसे मंचों का इस्तेमाल राजनीतिक और व्यक्तिगत कटाक्ष के लिए किया जा रहा है।
संवाद की परंपराओं पर उठ रहे सवाल
राजनीतिक संवाद और वाद-विवाद की एक निश्चित मर्यादा होती है, जिसे लोकतांत्रिक व्यवस्था में आवश्यक माना जाता है। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष जैसे महत्वपूर्ण संवैधानिक पद पर आसीन नेता की मौजूदगी में इस प्रकार की मिमिक्री को बढ़ावा मिलने से कांग्रेस पार्टी की कार्यशैली पर भी सवाल उठ रहे हैं। जानकारों का कहना है कि कोटा से शुरू हुआ यह छात्र संवाद कार्यक्रम अपने वैचारिक उद्देश्यों से भटककर व्यक्तिगत छींटाकशी का माध्यम बनता जा रहा है, जिससे आने वाले समय में पार्टी के राजनीतिक अस्तित्व पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है।
