भारतीय रसोई में लौकी को एक हल्की, सुपाच्य और आसानी से बनने वाली सब्जी के तौर पर जाना जाता है। कई लोग वजन घटाने, डायबिटीज को नियंत्रित करने और शरीर को डिटॉक्स करने के लिए रोज सुबह खाली पेट लौकी का जूस पीते हैं। लेकिन क्या इन तमाम घरेलू नुस्खों के पीछे ठोस वैज्ञानिक प्रमाण हैं? आइए जानते हैं कि स्वास्थ्य के लिहाज से लौकी का जूस कितना फायदेमंद है और इसके सेवन में क्या सावधानियां रखनी चाहिए।
पोषण और फाइबर: जूस से ज्यादा साबुत सब्जी क्यों है बेहतर
लौकी में पानी की भरपूर मात्रा होती है और इसमें पोटैशियम, विटामिन सी के अलावा कुछ जरूरी मिनरल्स भी पाए जाते हैं। हालांकि, इन पोषक तत्वों की वास्तविक मात्रा लौकी की किस्म, ताजगी और उसे तैयार करने के तरीके पर निर्भर करती है। हर गिलास लौकी के जूस से शरीर को एक निश्चित मात्रा में ही पोषक तत्व मिलेंगे, ऐसा दावा करना ठीक नहीं है।
पाचन और कब्ज के मामलों में साबुत लौकी का सेवन अधिक फायदेमंद माना जाता है। सब्जी के रूप में खाने से शरीर को पर्याप्त फाइबर मिलता है, जो सामान्य मल त्याग में मदद करता है। जूस निकालते समय गूदा और फाइबर अलग हो जाते हैं, जिससे इसके फायदे कम हो जाते हैं। केवल लौकी के जूस पर निर्भर रहने के बजाय फाइबर युक्त भोजन, पर्याप्त पानी और शारीरिक गतिविधि पर ध्यान देना ज्यादा कारगर है।
क्या लौकी के जूस से वजन कम होता है?
रिसर्च गेट के अनुसार, लौकी के जूस को कम कैलोरी वाला पेय माना जाता है, यही वजह है कि यह वजन घटाने के नुस्खों में लोकप्रिय है। यदि कोई व्यक्ति हाई-कैलोरी ड्रिंक्स या मीठे पेय की जगह बिना चीनी वाले लौकी के जूस को अपनाता है, तो उसके शरीर में जाने वाली कुल कैलोरी कम हो सकती है, जिससे वजन कंट्रोल करने की योजना में मदद मिल सकती है।
हालांकि, सिर्फ लौकी का जूस पीने से पेट की चर्बी अपने आप कम नहीं होती। शरीर की चर्बी घटाने के लिए कैलोरी इंटेक और खर्च के बीच संतुलन, पौष्टिक डाइट, नियमित एक्सरसाइज और पूरी नींद जरूरी है। किसी खास जूस के सहारे भोजन छोड़ना सेहत के लिए नुकसानदायक हो सकता है, क्योंकि इससे प्रोटीन और फाइबर जैसे जरूरी पोषक तत्वों की कमी हो जाती है।
ब्लड शुगर और कोलेस्ट्रॉल पर क्या कहती है रिसर्च?
पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों में लौकी का उपयोग डायबिटीज जैसी समस्याओं के लिए किया जाता रहा है। कुछ लैब और एनिमल स्टडीज में इसके अर्क के संभावित प्रभावों की जांच की गई है।
साइंस डायरेक्ट के एक अध्ययन के मुताबिक, कुछ इंसानों को 90 दिनों तक खाली पेट 200 मिलीलीटर ताजा और बिना कड़वाहट वाला लौकी का रस दिया गया। इस दौरान उनके रक्त शर्करा के स्तर में कमी के साथ-साथ लिपिड प्रोफाइल और एंटीऑक्सीडेंट मार्करों में सुधार दर्ज किया गया। इसके बावजूद, इसे किसी बीमारी की दवा का विकल्प नहीं माना जा सकता।
कड़वी लौकी का जूस हो सकता है जानलेवा
लौकी के जूस से जुड़ा सबसे बड़ा खतरा इसका असामान्य रूप से कड़वा स्वाद है। कुछ लौकी में 'कुकुर्बिटासिन' (Cucurbitacins) नामक प्राकृतिक विषैले यौगिक अधिक मात्रा में होते हैं, जो गंभीर विषाक्तता का कारण बन सकते हैं।
विशेषज्ञों के अनुसार, कड़वी लौकी का जूस पीने के बाद पेट में तेज दर्द, उल्टी, दस्त, खून की उल्टी और ब्लड प्रेशर गिरने जैसी गंभीर समस्याएं पैदा हो सकती हैं। मेडिकल साहित्य में ऐसे कई मामले दर्ज हैं। इसलिए यदि लौकी का स्वाद कड़वा लगे, तो उसका जूस भूलकर भी न पिएं। किसी भी स्वास्थ्य समस्या के लिए घरेलू नुस्खों के बजाय डॉक्टर की सलाह और प्रमाणित इलाज को ही प्राथमिकता दें।
