मेरठ के चर्चित नीला ड्रम हत्याकांड में जिला एवं सत्र न्यायालय ने बड़ा फैसला सुनाया है। जिला एवं सत्र न्यायाधीश अरविंद कुमार मिश्रा ने मुख्य आरोपी मुस्कान और उसके प्रेमी साहिल शुक्ला को मौत की सजा सुनाई है। यह खौफनाक वारदात मार्च 2025 की है, जब सौरभ राजपूत की हत्या कर उसके शव के टुकड़े एक नीले ड्रम में छिपाए गए थे और ऊपर से सीमेंट भर दिया गया था। फैसले के वक्त दोनों दोषी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से जेल से जुड़े हुए थे।
कोर्ट में क्या हुआ बातचीत के दौरान?
सुनवाई की शुरुआत में जिला जज ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए दोनों दोषियों से बात की और उनके नाम, शिक्षा व परिवार के बारे में जानकारी ली। इसके बाद जब जज ने मुस्कान से आखिरी बार पूछा कि वह कुछ कहना चाहती है या नहीं, तो उसने अपनी छोटी बेटी का ख्याल रखने की गुहार लगाई। इसके अलावा उसने कोर्ट में और कुछ नहीं कहा।
दूसरी ओर, बचाव पक्ष की वकील रेखा जैन ने दलील दी कि यह मामला सबसे दुर्लभ मामलों की श्रेणी में नहीं आता, इसलिए मृत्युदंड से बचा जाना चाहिए। दलील देते वक्त वकील मुस्कान की दो बेटियों और उसके बुजुर्ग माता-पिता का हवाला देते हुए भावुक भी हो गईं। वहीं, सौरभ के परिवार की पैरवी कर रहे वकील विजय बहादुर सिंह ने इस कृत्य को बेहद क्रूर बताते हुए फांसी की मांग की। सरकारी वकील केके चौबे ने अदालत में पक्ष रखा कि यदि पति-पत्नी के बीच विवाद था, तो अलग होने के अन्य कानूनी रास्ते मौजूद थे। इतने गंभीर अपराध में नरमी बरतना न्याय प्रणाली के लिए गलत मिसाल बनेगा।
ऐसे रची गई थी हत्या की साजिश
सौरभ राजपूत ने साल 2016 में मुस्कान रस्तोगी से प्रेम विवाह किया था। साल 2019 में दोनों के बीच मनमुटाव के बाद वे अलग हो गए थे। उसी साल जन्मी उनकी बेटी पीहू वर्तमान में अपने नाना-ननी के पास रह रही है। कुछ समय बाद परिवार के हस्तक्षेप से दोनों में समझौता हुआ और वे साथ रहने लगे, जिसके बाद सौरभ काम के सिलसिले में लंदन चला गया। इसी दरमियान मुस्कान की अपने स्कूल के पुराने सहपाठी साहिल शुक्ला से नजदीकियां बढ़ गईं।
बीते साल 24 फरवरी को सौरभ लंदन से भारत लौटा था। अभियोजन पक्ष के मुताबिक, 3 मार्च की रात मुस्कान और साहिल ने खाने में नशीला पदार्थ मिलाकर सौरभ को बेहोश कर दिया और फिर चाकू से गोदकर उसकी हत्या कर दी। साक्ष्य छिपाने के लिए शव को टुकड़ों में काटकर नीले ड्रम में डाला गया और उसमें सीमेंट भर दिया गया। मुस्कान के माता-पिता ने भी पुलिस को लिखकर दे दिया था कि उनका इस मामले से कोई नाता नहीं है और वे उससे संबंध नहीं रखना चाहते।
22 गवाह और 1000 पन्नों की चार्जशीट बनी आधार
पुलिस ने इस सनसनीखेज मामले में लगभग एक हजार पन्नों की चार्जशीट अदालत में दाखिल की थी। जुलाई 2025 में जिला जज की अदालत में मुकदमे की सुनवाई शुरू हुई, जिसके दौरान अभियोजन पक्ष ने कुल 22 गवाहों के बयान दर्ज कराए। जांच के दौरान आरोपियों द्वारा चाकू, उस्तरा, सीमेंट, बालू और नीला ड्रम खरीदने के पुख्ता सुराग हाथ लगे। फोरेंसिक टीम और पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में भी धारदार हथियार से हमला करने की पुष्टि हुई।
फैसला सुनाते हुए जिला जज अरविंद कुमार मिश्रा ने टिप्पणी की कि इस तरह के गंभीर अपराध समाज में भय और असुरक्षा की भावना पैदा करते हैं। कोर्ट की जिम्मेदारी न सिर्फ सजा तय करना है, बल्कि समाज के हितों और लोगों में न्याय का भरोसा कायम रखना भी है। मामले में दोषियों के साथ कुल्लू और शिमला घूमने वाले ड्राइवर अजब सिंह ने भी कड़ी सजा की मांग की थी। सौरभ के परिजनों ने अदालत के इस फैसले पर संतोष जताया है।
