कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने केंद्र सरकार और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर तीखा प्रहार किया है। उन्होंने बुधवार को कहा कि प्रधानमंत्री खुद को देश के कानून और संविधान से ऊपर न समझें, क्योंकि वह भी लोकसभा के 543 सांसदों में से महज एक हैं। खरगे ने संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार का जिक्र करते हुए आरोप लगाया कि सरकार उनके पदों और प्रशासनिक व्यवस्था का इस्तेमाल अपने हितों के लिए कर रही है।
खरगे ने आरोप लगाया कि विपक्ष जब भी देश के अहम मुद्दों पर प्रधानमंत्री को पत्र लिखता है, तो वे सीधे जवाब देने के बजाय अपने सहयोगियों से जवाब तैयार करवाते हैं।
महिला आरक्षण और सरकार की नीयत पर सवाल
महिला आरक्षण के मुद्दे पर सरकार को घेरते हुए कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि मौजूदा लोकसभा की सदस्य संख्या और वर्तमान परिसीमन व्यवस्था के तहत ही एक-तिहाई सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित की जा सकती हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि जब कानूनी और प्रशासनिक रूप से यह संभव है, तो इसे लागू करने में अब तक देरी क्यों की जा रही है।
खरगे ने दावा किया कि सत्ता पक्ष इस संवेदनशील विषय पर केवल विपक्ष की छवि धूमिल करने की राजनीति कर रहा है। यदि कांग्रेस पार्टी या अन्य विपक्षी दल महिला आरक्षण के विरोधी होते, तो वे पहले इसे संसद में पारित कराने का प्रयास ही क्यों करते। प्रधानमंत्री इस मोर्चे पर जनता के सामने स्थिति साफ करने के बजाय केवल भ्रम फैला रहे हैं।
'देश की जनता चुप नहीं बैठेगी'
कांग्रेस अध्यक्ष ने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि यदि कार्यशैली में सुधार नहीं हुआ और मनमाने फैसले लिए जाते रहे, तो मतदाता इसका करारा जवाब देंगे। उन्होंने जोर देकर कहा कि प्रधानमंत्री को विपक्ष की ओर से उठाए जाने वाले गंभीर मुद्दों पर संज्ञान लेना चाहिए और संसद के भीतर सीधे संवाद से नहीं कतराना चाहिए।
