AISA की अध्यक्ष नेहा बोरा ने दिल्ली के मंदिर मार्ग पुलिस थाने के बाहर सुरक्षा व्यवस्था और पुलिस की कार्यप्रणाली पर कड़े सवाल खड़े किए हैं। SEM कोर्ट में पेशी के सिलसिले में पहुंचीं बोरा ने आरोप लगाया कि थाने के बाहर 50 से अधिक लोगों ने जमा होकर उन्हें धमकियां दीं, लेकिन पुलिस ने उन्हें हटाने के लिए कोई कदम नहीं उठाया।
'देखते हैं कौन बचाता है' — नारेबाज़ी और धमकियों का आरोप
SEM कोर्ट पहुंचने के दौरान मंदिर मार्ग थाने के बाहर हुए घटनाक्रम पर नाराजगी जताते हुए नेहा बोरा ने कहा कि थाने के बाहर भीड़ जुटाकर उनके खिलाफ सीधे नारे लगाए जा रहे थे।
बोरा ने आरोप लगाया- "वहां 50 से 60 लोग खड़े होकर कह रहे थे कि देखते हैं कि नेहा बोरा को कौन बचाता है। पुलिस इन लोगों को वहां से हटाने के बजाय तमाशबीन बनी हुई थी, जबकि शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने वालों को तुरंत अराजक मान लिया जाता है।"
उन्होंने पुलिस की भूमिका पर सवाल उठाते हुए कहा कि इस तरह की खुलेआम नारेबाजी और धमकियां शांति भंग करने के दायरे में आती हैं, इसके बावजूद स्थानीय पुलिस ने कोई हस्तक्षेप नहीं किया। हालांकि, थाने के बाहर जुटे लोगों की वास्तविक पहचान और उनके वहां मौजूद रहने के कारणों को लेकर फिलहाल कोई आधिकारिक पुष्टि सामने नहीं आई है।
दिल्ली हाई कोर्ट से निर्देश के बाद SEM कोर्ट में पेशी
यह पूरा घटनाक्रम दिल्ली हाई कोर्ट द्वारा राहत नहीं दिए जाने के बाद सामने आया है। अदालत के निर्देश के बाद नेहा बोora मंदिर मार्ग स्थित SEM कोर्ट पहुंची थीं, जहां कार्यपालक मजिस्ट्रेट ने उन्हें नोटिस से जुड़े सभी आवश्यक दस्तावेज सौंप दिए।
मामले की अगली सुनवाई आगामी 28 अक्टूबर को तय की गई है। इसी निर्धारित तिथि पर नेहा बोरा को अदालत में अपना जवाब दाखिल करना होगा।
