पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (PoK) के रावलकोट में शुक्रवार को पाकिस्तानी सेना की कार्रवाई में दो प्रदर्शनकारियों की जान चली गई। पिछले दो दिनों के दौरान सुरक्षाबलों की हिंसा में मरने वालों का कुल आंकड़ा 9 तक पहुंच गया है। इससे पहले गुरुवार को हुई गोलीबारी में 7 प्रदर्शनकारी मारे गए थे।
यूनाइटेड कश्मीर पीपुल्स नेशनल पार्टी (UKPNP) ने आरोप लगाया कि सुरक्षाबलों ने शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे नागरिकों को निशाना बनाया। इस कार्रवाई में भारी मशीनगनों, बख्तरबंद गाड़ियों और ड्रोन का इस्तेमाल किया गया।
तीन प्रमुख जगहों पर ताबड़तोड़ कार्रवाई
पाकिस्तानी सुरक्षाबलों ने पिछले दो दिनों के दौरान रावलकोट के साथ-साथ मटियालमेरा बस टर्मिनल और उमर फारूक चौक पर चल रहे धरनों को कुचलने की कोशिश की। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि विरोध प्रदर्शनों को रोकने के लिए सेना ने गोलियों के साथ ड्रोन हमलों का सहारा लिया।
7 जून से शुरू हुए इस आंदोलन ने अब विकराल रूप ले लिया है। इन दो दिनों की हिंसा के बाद PoK में आंदोलन के दौरान जान गंवाने वाले लोगों की कुल संख्या 155 तक पहुंच गई है।
राजनीतिक अधिकारों और आर्थिक संकट से सुलग रहा PoK
इस जनआंदोलन की शुरुआत स्थानीय नागरिकों के राजनीतिक अधिकारों और गंभीर आर्थिक समस्याओं को लेकर हुई थी। प्रदर्शनकारियों की मुख्य मांगों में पाकिस्तानी सुरक्षाबलों की तत्काल वापसी और अवामी एक्शन कमेटी के नेताओं पर दर्ज आतंकवाद निरोधक मामलों को खत्म करना शामिल है।
यह पूरा संघर्ष मुख्य तौर पर चार बड़े मुद्दों पर केंद्रित है:
- आरक्षित सीटों का विवाद: PoK विधानसभा की 53 सीटों में से 12 सीटें पाकिस्तान में रहने वाले कश्मीर मूल के लोगों के लिए आरक्षित हैं। स्थानीय लोगों का आरोप है कि इन सीटों के जरिए पाकिस्तानी सरकार क्षेत्र की राजनीति में सीधा दखल देती है। 7 जून को PoK के सुप्रीम कोर्ट ने फैसला दिया था कि संवैधानिक संशोधन के बिना इन सीटों को खत्म नहीं किया जा सकता, जिसके बाद से तनाव और बढ़ गया।
- मंगला डैम और बिजली संकट: इस क्षेत्र के मंगला डैम से बड़े पैमाने पर बिजली का उत्पादन होता है, लेकिन स्थानीय निवासियों को वही बिजली महंगे दामों पर मिलती है। प्रदर्शनकारियों की मांग है कि डैम से पैदा होने वाली बिजली रियायती दरों पर स्थानीय लोगों को दी जाए।
- महंगाई और आटे की किल्लत: क्षेत्र में आसमान छूती महंगाई और आटे की भारी कमी से आम जनजीवन बेहाल है। प्रदर्शनकारी चाहते हैं कि बिजली के साथ-साथ आटे पर भी सब्सिडी दी जाए।
- सुरक्षाबलों की वापसी: आंदोलन को दबाने के लिए तैनात पाकिस्तानी रेंजर्स और सेना को वापस बुलाने की मांग लगातार तेज हो रही है।
