Saturday, 7 November 2026
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PoK के रावलकोट में सेना की फायरिंग: प्रदर्शनकारियों पर मशीनगन और ड्रोन से हमले; दो दिनों में 9 की मौत

संक्षेप में

पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (PoK) के रावलकोट में पाकिस्तानी सेना की फायरिंग से दो प्रदर्शनकारियों की मौत हो गई है। पिछले दो दिनों में सुरक्षाबलों की हिंसा में 9 लोगों की जान जा चुकी है, जिससे 7 जून से जारी आंदोलन में मरने वालों का कुल आंकड़ा 155 तक पहुंच गया है।

मुख्य बातें

  • रावलकोट में शुक्रवार को पाकिस्तानी सेना की फायरिंग में 2 प्रदर्शनकारियों की मौत हुई।
  • गुरुवार और शुक्रवार को मिलाकर पिछले दो दिनों में कुल 9 लोगों की जान गई है।
  • 7 जून से शुरू हुए इस आंदोलन में अब तक कुल 155 लोगों की मौत हो चुकी है।
  • UKPNP ने सुरक्षाबलों पर भारी मशीनगनों और ड्रोन से हमले का आरोप लगाया है।
देश विदेश
PoK के रावलकोट में सेना की फायरिंग: प्रदर्शनकारियों पर मशीनगन और ड्रोन से हमले; दो दिनों में 9 की मौत

पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (PoK) के रावलकोट में शुक्रवार को पाकिस्तानी सेना की कार्रवाई में दो प्रदर्शनकारियों की जान चली गई। पिछले दो दिनों के दौरान सुरक्षाबलों की हिंसा में मरने वालों का कुल आंकड़ा 9 तक पहुंच गया है। इससे पहले गुरुवार को हुई गोलीबारी में 7 प्रदर्शनकारी मारे गए थे।

यूनाइटेड कश्मीर पीपुल्स नेशनल पार्टी (UKPNP) ने आरोप लगाया कि सुरक्षाबलों ने शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे नागरिकों को निशाना बनाया। इस कार्रवाई में भारी मशीनगनों, बख्तरबंद गाड़ियों और ड्रोन का इस्तेमाल किया गया।

तीन प्रमुख जगहों पर ताबड़तोड़ कार्रवाई

पाकिस्तानी सुरक्षाबलों ने पिछले दो दिनों के दौरान रावलकोट के साथ-साथ मटियालमेरा बस टर्मिनल और उमर फारूक चौक पर चल रहे धरनों को कुचलने की कोशिश की। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि विरोध प्रदर्शनों को रोकने के लिए सेना ने गोलियों के साथ ड्रोन हमलों का सहारा लिया।

7 जून से शुरू हुए इस आंदोलन ने अब विकराल रूप ले लिया है। इन दो दिनों की हिंसा के बाद PoK में आंदोलन के दौरान जान गंवाने वाले लोगों की कुल संख्या 155 तक पहुंच गई है।

राजनीतिक अधिकारों और आर्थिक संकट से सुलग रहा PoK

इस जनआंदोलन की शुरुआत स्थानीय नागरिकों के राजनीतिक अधिकारों और गंभीर आर्थिक समस्याओं को लेकर हुई थी। प्रदर्शनकारियों की मुख्य मांगों में पाकिस्तानी सुरक्षाबलों की तत्काल वापसी और अवामी एक्शन कमेटी के नेताओं पर दर्ज आतंकवाद निरोधक मामलों को खत्म करना शामिल है।

यह पूरा संघर्ष मुख्य तौर पर चार बड़े मुद्दों पर केंद्रित है:

  • आरक्षित सीटों का विवाद: PoK विधानसभा की 53 सीटों में से 12 सीटें पाकिस्तान में रहने वाले कश्मीर मूल के लोगों के लिए आरक्षित हैं। स्थानीय लोगों का आरोप है कि इन सीटों के जरिए पाकिस्तानी सरकार क्षेत्र की राजनीति में सीधा दखल देती है। 7 जून को PoK के सुप्रीम कोर्ट ने फैसला दिया था कि संवैधानिक संशोधन के बिना इन सीटों को खत्म नहीं किया जा सकता, जिसके बाद से तनाव और बढ़ गया।
  • मंगला डैम और बिजली संकट: इस क्षेत्र के मंगला डैम से बड़े पैमाने पर बिजली का उत्पादन होता है, लेकिन स्थानीय निवासियों को वही बिजली महंगे दामों पर मिलती है। प्रदर्शनकारियों की मांग है कि डैम से पैदा होने वाली बिजली रियायती दरों पर स्थानीय लोगों को दी जाए।
  • महंगाई और आटे की किल्लत: क्षेत्र में आसमान छूती महंगाई और आटे की भारी कमी से आम जनजीवन बेहाल है। प्रदर्शनकारी चाहते हैं कि बिजली के साथ-साथ आटे पर भी सब्सिडी दी जाए।
  • सुरक्षाबलों की वापसी: आंदोलन को दबाने के लिए तैनात पाकिस्तानी रेंजर्स और सेना को वापस बुलाने की मांग लगातार तेज हो रही है।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

PoK के रावलकोट में ताजा हिंसा में कितने लोगों की मौत हुई है?

शुक्रवार को रावलकोट में पाकिस्तानी सेना की फायरिंग में 2 लोगों की मौत हो गई। इसके साथ ही पिछले दो दिनों में मरने वालों की कुल संख्या 9 हो गई है।

PoK में चल रहे प्रदर्शनों की मुख्य वजहें क्या हैं?

प्रदर्शनों की मुख्य वजहों में विधानसभा की 12 आरक्षित सीटों का विवाद, मंगला डैम से मिलने वाली बिजली के महंगे दाम, आटे की कमी और पाकिस्तानी सुरक्षाबलों की वापसी की मांग शामिल है।

7 जून से शुरू हुए इस आंदोलन में अब तक कुल कितने लोग मारे जा चुके हैं?

7 जून से PoK में शुरू हुए विरोध प्रदर्शनों और हालिया हिंसक घटनाओं के बाद मरने वालों की कुल संख्या 155 हो गई है।

UKPNP ने पाकिस्तानी सेना पर क्या आरोप लगाया है?

यूनाइटेड कश्मीर पीपुल्स नेशनल पार्टी (UKPNP) ने आरोप लगाया है कि सुरक्षाबलों ने शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों पर भारी मशीनगनों, बख्तरबंद गाड़ियों और ड्रोन से हमले किए।