श्री रामचरितमानस के रचयिता गोस्वामी तुलसीदास महाराज की जयंती के मौके पर छिंदवाड़ा के चौरई में पिछले 60 साल से अखिल भारतीय मानस पाठ प्रतियोगिता और पारंपरिक शैला नाच के साथ ही झांझे प्रतियोगिता का आयोजन होता है. चौरई की गलियों में राधा कृष्ण, राम सीता, हनुमान और बंदरों की सेना उतरी. कोई गेड़ी पर नाच रहा था तो कोई झांझे और मंजीरों की धुन पर थिरक रहा था. तुलसी जयंती समारोह मनाने की ये परपंरा सालों से चली आ रही है. कार्यक्रम की तैयारियां कई दिन पहले से शुरू हो जाती हैं. कार्यक्रम में मध्य प्रदेश सहित दूसरे प्रदेशों की मंडलियां हिस्सा लेती हैं. श्री तुलसीदास जयंती समारोह के अध्यक्ष ईश्वर सिंह चौधरी ने बताया "सनातन धर्म के प्रचार-प्रसार का सबसे बड़ा माध्यम श्री रामचरितमानस है. रामचरितमानस के माध्यम से हमें जीवन जीने की कला के साथ ही धर्म का पालन और अनुशासन की सीख भी मिलती है."चौरई के श्री माता मंदिर में 21 दिनों का अखंड श्री रामचरितमानस का पाठ किया जाता है. उसके बाद श्री तुलसी जयंती के दिन पारंपरिक सैला नृत्य प्रतियोगिता, झांझे प्रतियोगिता, देवी यस गायन प्रतियोगिता के साथ ही धार्मिक रंगोली प्रतियोगिता का आयोजन किया जाता है. इसका उद्देश्य अपनी परंपराओं और पुरानी रीतिरिवाज को जीवित रखना है.श्री तुलसीदास की जयंती समारोह समिति के अनुसार मध्य प्रदेश में तुलसी जयंती समारोह इतने बड़े रूप में और कहीं नहीं मनाया जाता है. यहां पर अखिल भारतीय मानस पाठ प्रतियोगिता का आयोजन किया जाता है, जो पूरी देश में विख्यात है. इसमें शामिल होने के लिए महाराष्ट्र, पंजाब, हरियाणा, बिहार, उत्तर प्रदेश सहित कई राज्य से रामायण मंडली या हिस्सा लेती हैं.