राजस्थान में पंचायत और नगरीय निकाय चुनावों को लेकर हलचल तेज हो गई है। हाईकोर्ट ने राज्य सरकार और राज्य निर्वाचन आयोग को 31 जुलाई 2026 तक हर हाल में चुनाव कराने के निर्देश जारी कर दिए हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर तैयारियां अब भी अधूरी हैं। चुनाव प्रक्रिया में सबसे बड़ी समस्या ओबीसी आरक्षण का निर्धारण बनकर सामने आया है। ओबीसी आयोग की रिपोर्ट और सीटों के अंतिम आरक्षण की सूची अभी तक जारी नहीं हो पाई है, जिसके चलते निर्वाचन आयोग चुनाव कार्यक्रम घोषित करने की स्थिति में नहीं है... जानकारी के अनुसार जिला स्तर पर सर्वे और डेटा संग्रहण का कार्य अपेक्षित गति से पूरा नहीं हो सका है। जब तक ओबीसी आरक्षण की अंतिम रिपोर्ट सरकार को नहीं मिलती, तब तक पंचायत और नगरीय निकायों की आरक्षित सीटों का नोटिफिकेशन जारी नहीं किया जा सकता। दूसरी ओर राज्य निर्वाचन आयोग अपनी तैयारियां लगभग पूरी कर चुका है। मतदाता सूची का प्रकाशन, ईवीएम की जांच और अन्य प्रारंभिक प्रक्रियाएं पहले ही पूरी की जा चुकी हैं।
वही राजनीतिक गलियारों में अब इस बात की चर्चा और भी तेज हो गई है कि चुनाव तय समय पर होंगे या फिर उन्हें आगे बढ़ाने की संभावना है। 'वन स्टेट-वन इलेक्शन' की चर्चाओं के बीच यह संभावना भी जताई जा रही है कि सरकार अतिरिक्त समय के लिए अदालत का रुख करती नजर आ रही है। विपक्ष इस मुद्दे को लेकर सरकार पर लगातार हमलावर है और चुनाव में देरी को लोकतांत्रिक प्रक्रिया से जोड़कर सवाल उठा रहा है।
फिलहाल प्रदेश के लाखों उम्मीदवारों, जनप्रतिनिधियों और राजनीतिक दलों की निगाहें सरकार, ओबीसी आयोग और निर्वाचन आयोग के अगले फैसले पर टिकी हैं। और आने वाले कुछ दिनों में स्थिति साफ हो सकती है कि राजस्थान में स्थानीय निकाय और पंचायत चुनाव जुलाई में होंगे या फिर चुनावी तारीखों को आगे बढ़ाया जायेगा।
