नीट पेपर लीक मामले में केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर 20 जुलाई को हुए संसद मार्च के बाद कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संस्थापक अभिजीत दीपके ने बड़ा बयान दिया है। उन्होंने दावा किया कि पुलिस लाठीचार्ज के बावजूद आंदोलन कमजोर नहीं पड़ा, बल्कि देशभर में उसे और समर्थन मिला। टीवी9 मराठी को दिए इंटरव्यू में दीपके ने कहा कि यदि उन्हें उस दिन आंदोलन में जुटी भीड़ का वास्तविक अंदाजा होता तो उसी दिन केंद्रीय शिक्षा मंत्री का इस्तीफा लिया जा सकता था। उन्होंने यह भी कहा कि आंदोलनकारियों ने चाहा तो पड़ोसी देशों जैसी स्थिति पैदा कर सकते थे, लेकिन संविधान और लोकतंत्र में विश्वास होने के कारण उन्होंने हिंसा का रास्ता नहीं चुना। दीपके ने आरोप लगाया कि संसद मार्च के दौरान जंतर-मंतर के आसपास जैमर लगाए गए, जिससे आंदोलनकारियों और मीडिया के बीच संपर्क प्रभावित हुआ और भीड़ का सही आकलन नहीं हो सका। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि छात्रों पर लाठीचार्ज का उद्देश्य उन्हें डराना और भविष्य में सरकार के खिलाफ आवाज उठाने से रोकना था। गौरतलब है कि 20 जुलाई को संसद मार्च के दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच झड़प हुई थी, जिसमें पुलिस ने लाठीचार्ज और आंसू गैस का इस्तेमाल किया, जबकि कुछ प्रदर्शनकारियों द्वारा पथराव किए जाने की भी बात सामने आई थी। इस दौरान 80 से अधिक लोगों के घायल होने की सूचना मिली थी।
नेपाल-बांग्लादेश जैसा हाल भारत में कर सकते थे - अभिजीत दीपके
संक्षेप में
नीट पेपर लीक मामले में केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर 20 जुलाई को हुए संसद मार्च के बाद कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक अभिजीत दीपके ने बड़ा बयान दिया है। उन्होंने दावा किया कि पुलिस लाठीचार्ज के बावजूद आंदोलन कमजोर नहीं पड़ा, बल्कि देशभर में उसे और समर्थन मिला। टीवी9 मराठी को दिए इंटरव्यू में दीपके ने कहा कि यदि उन्हें उस दिन आंदोलन में जुटी भीड़ का वास्तविक अंदाजा होता तो उसी दिन केंद्रीय शिक्षा मंत्री का इस्तीफा लिया जा सकता था।
मुख्य बातें
- नीट पेपर लीक मामले को लेकर CJP संस्थापक अभिजीत दीपके ने जंतर-मंतर प्रदर्शन के बाद बड़ा बयान दिया।
- 20 जुलाई के संसद मार्च के दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच झड़प हुई थी, जिसमें लाठीचार्ज और आंसू गैस का इस्तेमाल किया गया।
- अभिजीत दीपके ने दावा किया कि आंदोलनकारियों ने हिंसा का रास्ता नहीं चुना क्योंकि उन्हें संविधान और लोकतंत्र पर भरोसा है।
दिल्ली
