क्रिएटिव प्रोड्यूसर अमिता माधवानी अपने नए प्रोजेक्ट ‘मोहिनी: खुद से प्यार’ के साथ मनोरंजन जगत में एक नई शुरुआत करने जा रही हैं। इसे भारत का पहला AI-पावर्ड म्यूजिकल माइक्रो-ड्रामा बताया जा रहा है, जिसे सोशल मीडिया के लिए 12 एपिसोड की सीरीज के तौर पर तैयार किया गया है।
AI एक टूल है, कहानीकार नहीं अमिता माधवानी स्पष्ट करती हैं कि AI को लेकर सबसे बड़ा भ्रम यह है कि वह रचनात्मक निर्णय लेने में सक्षम है। उनके अनुसार, 'मोहिनी' की कहानी पहले इंसानों द्वारा लिखी गई थी, जिसके बाद AI को महज एक क्रिएटिव टूल के रूप में इस्तेमाल किया गया। वे कहती हैं- "AI खुद कुछ तय नहीं करता, इंसान ही तय करता है कि उससे क्या करवाना है। डिजिटल कैमरे और कंप्यूटर की तरह AI भी फिल्म निर्माण का एक माध्यम है, लेकिन कहानी की आत्मा और भावनाएं इंसानी सोच से ही आती हैं।"
तकनीक से बढ़ेगा कंटेंट आउटपुट तकनीक के आने से कलाकारों और तकनीकी टीमों की जरूरत कम होने की आशंकाओं को अमिता सिरे से खारिज करती हैं। उनका तर्क है कि बहस इस पर नहीं होनी चाहिए कि टीम का आकार कितना घटेगा, बल्कि इस पर कि तकनीक से आउटपुट कितना बढ़ेगा। "अगर एक टीम पहले साल में एक प्रोजेक्ट करती थी और अब उसी समय में कई प्रोजेक्ट कर सकती है, तो यह नए अवसर पैदा करेगा। AI कहानी नहीं लिखेगा, बल्कि उसे कहने का तरीका बदलेगा," अमिता ने कहा।
टाइगर श्रॉफ की फिल्म में भी AI का उपयोग राम माधवानी और अमिता की टीम फिलहाल AI का उपयोग फिल्म निर्माण के बजाय प्री-प्रोडक्शन और विजुअल डेवलपमेंट के लिए कर रही है। टाइगर श्रॉफ के साथ आने वाली अगली फिल्म की तैयारियों में भी AI-आधारित विजुअल प्लानिंग का इस्तेमाल किया जा रहा है। पहले जो सीन और फ्रेम स्केच या रेफरेंस के जरिए समझाए जाते थे, अब AI उन्हें तेजी से विजुअल रेफरेंस में बदल देता है। इससे सिनेमैटोग्राफी और कॉस्ट्यूम टीम के बीच बेहतर तालमेल संभव हो पाता है।
'मोहिनी: खुद से प्यार' के जरिए अमिता का उद्देश्य भारतीय कला, कथक और संगीत को नई तकनीक से जोड़कर दर्शकों को एक नया अनुभव देना है। वे मानती हैं कि अंत में वही कंटेंट सफल होगा जिसमें सच्चाई और मजबूत कहानी होगी।
