पोलैंड के प्रधानमंत्री डोनाल्ड टस्क तीन दिवसीय आधिकारिक यात्रा पर भारत पहुँचे हैं। अपनी इस यात्रा के दौरान उन्होंने गुरुवार को नई दिल्ली के हैदराबाद हाउस में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की। दोनों नेताओं के बीच हुई इस उच्चस्तरीय बैठक में भारत और पोलैंड के ऐतिहासिक संबंधों के साथ-साथ व्यापारिक सहयोग बढ़ाने पर भी चर्चा हुई।
इस द्विपक्षीय मुलाकात के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने द्वितीय विश्व युद्ध के दौर के उस ऐतिहासिक मानवीय योगदान को याद किया, जो दोनों देशों के बीच अटूट रिश्ते की नींव बना था। बातचीत में जामनगर के 'गुड महाराजा' के रूप में जाने जाने वाले महाराजा दिग्विजयसिंहजी रणजीतसिंहजी जडेजा के योगदान का विशेष रूप से जिक्र किया गया।
'गुड महाराजा' और पोलिश बच्चों का शरण स्थल
वर्ष 1939 में जर्मनी और सोवियत संघ के हमलों के बाद पोलैंड पर कब्जा हो गया था, जिसके चलते हजारों पोलिश नागरिक बेघर हो गए थे। उस संकट के समय मानवीय दृष्टिकोण अपनाते हुए 1942 में नवानगर रियासत के महाराजा दिग्विजयसिंहजी ने जामनगर के पास बालाचड़ी में करीब 1,000 पोलिश बच्चों को शरण दी थी।
महाराजा ने इन बच्चों के रहने, खाने, शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं का पूरा इंतजाम किया था। इसके अलावा उन्हें अपनी मातृभाषा और संस्कृति से जुड़े रहने की पूरी स्वतंत्रता दी गई थी। इसी उदारता के कारण पोलैंड में उन्हें 'डोब्री महाराजा' यानी 'गुड महाराजा' की उपाधि से सम्मानित किया गया।
केवल जामनगर ही नहीं, बल्कि भारत के अन्य हिस्सों में भी पोलिश शरणार्थियों को आश्रय मिला था। वर्ष 1943 में कोल्हापुर रियासत के वलीवडे शिविर में करीब 5,000 पोलिश शरणार्थी रहे, जिनके लिए स्थानीय स्तर पर स्कूल और अस्पताल की व्यवस्था की गई थी। द्वितीय विश्व युद्ध समाप्त होने के बाद 1948 तक अधिकांश पोलिश नागरिक अपने स्वदेश लौट गए थे।
पोलैंड में महाराजा दिग्विजयसिंहजी को हमेशा विशेष सम्मान की दृष्टि से देखा गया। उनके निधन के बाद उन्हें पोलैंड के सर्वोच्च नागरिक सम्मानों में शामिल 'कमांडर्स क्रॉस ऑफ द ऑर्डर ऑफ मेरिट' से नवाजा गया। इसके अलावा 1989 में वारसॉ में उनके नाम पर 'गुड महाराजा स्क्वायर' का निर्माण किया गया था।
16 साल बाद भारत आए डोनाल्ड टस्क, बेंगलुरु का भी दौरा
पोलैंड के प्रधानमंत्री के रूप में डोनाल्ड टस्क का यह दौरा 16 साल के अंतराल के बाद हो रहा है। इससे पहले वह अपने पिछले कार्यकाल के दौरान 2010 में भारत आए थे। इस बार उनके साथ लगभग 100 पोलिश कंपनियों का एक बड़ा व्यापारिक प्रतिनिधिमंडल भी आया है, जो दोनों देशों के बीच आर्थिक साझेदारी को नई दिशा देने पर केंद्रित है। पोलैंड सरकार की योजना वर्ष 2030 तक भारत के साथ अपने द्विपक्षीय व्यापार को दोगुना करने की है।
दिल्ली में अपने आधिकारिक कार्यक्रम संपन्न करने के बाद, टस्क 23 अक्टूबर को बेंगलुरु के दौरे पर जाएंगे। वहां उनका कार्यक्रम सूचना प्रौद्योगिकी और अंतरिक्ष क्षेत्र से जुड़े प्रमुख उद्योग प्रतिनिधियों तथा कारोबारियों के साथ बैठक करने का है।
