राजस्थान में वाहनों पर धार्मिक संदेश और इष्ट देवों के नाम लिखे होने पर काटे जा रहे चालानों को लेकर विवाद लगातार बढ़ रहा है। बाड़मेर जिले में एक वाहन पर 'बाबा गरीबनाथ जी' लिखे होने के कारण चालान काटे जाने का मामला सामने आने के बाद शिव से निर्दलीय विधायक रविंद्र सिंह भाटी ने सरकार और पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए कहा, "क्या राम राज्य में अपने इष्ट का नाम लिखना भी गुनाह है?" उन्होंने सोशल मीडिया पर चालान की प्रति साझा करते हुए कहा कि यदि यातायात नियमों का पालन कराना आवश्यक है तो कानून का समान रूप से सभी पर पालन होना चाहिए और किसी की धार्मिक आस्था को ठेस पहुंचाने वाली कार्रवाई उचित नहीं है। इसके बाद जोधपुर में 'जय मां जगदम्बे' और जयपुर में 'जय बजरंगबली' लिखी गाड़ियों पर चालान की प्रतियां भी सोशल मीडिया पर वायरल हुई जिससे पूरे प्रदेश में इस मुद्दे पर बहस तेज हो चुकी है...  सोशल मीडिया पर बड़ी संख्या में लोगों ने पुलिस की कार्रवाई का विरोध करते हुए कहा कि पुलिस को अपराध नियंत्रण, महिला सुरक्षा और सड़क हादसों की रोकथाम जैसे गंभीर मुद्दों पर ज्यादा ध्यान देना जरुरी है..  जबकि कई लोगों ने इसे धार्मिक भावनाओं से जुड़ा मामला बताया और कहा की कानून के समान और निष्पक्ष पालन की मांग की। वहीं, कानूनी जानकारों के मुताबिक मोटर व्हीकल एक्ट के तहत नंबर प्लेट पर किसी भी प्रकार का नाम, धार्मिक संदेश या अतिरिक्त शब्द लिखना नियमों के विरुद्ध है, लेकिन वाहन की बॉडी, शीशे या अन्य हिस्सों पर लिखे धार्मिक संदेशों को लेकर अलग-अलग परिस्थितियों और स्थानीय स्तर पर नियमों की व्याख्या के आधार पर कार्रवाई की जाती है। ऐसे में यह मामला अब सिर्फ ट्रैफिक नियमों तक सीमित नहीं रहकर कानून की व्याख्या, प्रशासनिक कार्रवाई और धार्मिक आस्था के बीच छिड़ी नई बहस का मुद्दा बन गया है।