भरतपुर जिले में खेती के नाम पर पंजीकृत ट्रैक्टरों का व्यावसायिक उपयोग करने वाले संचालकों पर परिवहन विभाग ने शिकंजा कस दिया है। बिना रजिस्ट्रेशन और टैक्स चुकाए ईंट-बजरी ढोने वाले ट्रैक्टर-ट्रॉलियों के खिलाफ विभाग ने सघन जांच अभियान शुरू कर दिया है, जिससे अवैध रूप से कामर्शियल काम करने वालों में हड़कंप है।

व्यावसायिक उपयोग पर अनिवार्य है टैक्स

नियमों के अनुसार, खेती के लिए उपयोग होने वाले ट्रैक्टर और ट्रॉलियों को टैक्स से छूट प्राप्त है। हालांकि, जब इनका उपयोग ईंट, बालू या अन्य सामग्री के परिवहन जैसे व्यावसायिक कार्यों में किया जाता है, तो मोटर वाहन अधिनियम के तहत टैक्स देना अनिवार्य हो जाता है। डीटीओ अभय मुदगल के मुताबिक, व्यावसायिक उपयोग के लिए ट्रॉली का 700 रुपये में रजिस्ट्रेशन और 1500 रुपये का वन-टाइम ग्रीन टैक्स जमा कराना आवश्यक है।

160 ट्रॉली ही रजिस्टर्ड, सैकड़ों दौड़ रही अवैध

परिवहन विभाग के आंकड़ों के अनुसार, पूरे जिले में मात्र 160 ट्रॉलियां ही विधिवत रजिस्टर्ड हैं। इसके विपरीत, सड़कों पर सैकड़ों की संख्या में ट्रैक्टर-ट्रॉलियां बिना रजिस्ट्रेशन के व्यावसायिक सामग्री ढो रही हैं। विभाग की जांच में यह भी सामने आया है कि कई किसान ट्रैक्टर का रजिस्ट्रेशन तो करा लेते हैं, लेकिन ट्रॉली का अलग से रजिस्ट्रेशन नहीं करवाते, जो कि अनिवार्य है।

रिफ्लेक्टर और नंबर प्लेट पर सख्ती

विभाग ने स्पष्ट किया है कि सुरक्षा मानकों का पालन न करने वालों पर भी कार्रवाई होगी। हर ट्रॉली पर वैध रजिस्ट्रेशन नंबर और पीछे की तरफ रिफ्लेक्टर लगाना अनिवार्य है। रिफ्लेक्टर के अभाव में होने वाली सड़क दुर्घटनाओं को देखते हुए विभाग ने अब सख्ती बरतने का फैसला किया है। रजिस्ट्रेशन न होने की स्थिति में जुर्माना लगाया जाएगा।