Saturday, 24 October 2026
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ब्रिक्स देशों में डिजिटल करंसी जोड़ने की तैयारी: क्रॉस-बॉर्डर पेमेंट तेज करने के लिए भारत का प्रस्ताव; समिट में होगी चर्चा

संक्षेप में

भारत ने ब्रिक्स देशों के बीच क्रॉस-बॉर्डर पेमेंट को तेज करने के लिए सेंट्रल बैंक डिजिटल करेंसी (CBDC) को आपस में जोड़ने का प्रस्ताव रखा है। नई दिल्ली में 12-13 सितंबर को होने वाले ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में इस पर चर्चा की जाएगी।

मुख्य बातें

  • भारत 12 से 13 सितंबर को नई दिल्ली में ब्रिक्स शिखर सम्मेलन की मेजबानी कर रहा है।
  • RBI ने ब्रिक्स सदस्यों की डिजिटल मुद्राओं को आपस में जोड़ने का प्रस्ताव रखा है।
  • प्रस्ताव का उद्देश्य क्रॉस-बॉर्डर पेमेंट को तेज और अधिक प्रभावी बनाना है।
देश विदेश
ब्रिक्स देशों में डिजिटल करंसी जोड़ने की तैयारी: क्रॉस-बॉर्डर पेमेंट तेज करने के लिए भारत का प्रस्ताव; समिट में होगी चर्चा

भारत ने ब्रिक्स (BRICS) देशों के बीच क्रॉस-बॉर्डर पेमेंट को तेज और अधिक प्रभावी बनाने के लिए सेंट्रल बैंक डिजिटल करेंसी (CBDC) को आपस में जोड़ने का प्रस्ताव रखा है। नई दिल्ली में इसी हफ्ते 12 से 13 सितंबर को होने वाले ब्रिक्स नेताओं के शिखर सम्मेलन में इस प्रस्ताव पर मुख्य रूप से चर्चा होने की उम्मीद है।

यह पहल रियो डी जेनेरियो में हुए 2025 के ब्रिक्स सम्मेलन में अपनाए गए घोषणापत्र पर आधारित है, जिसमें सदस्य देशों की पेमेंट प्रणालियों के बीच आपसी तालमेल बढ़ाने पर जोर दिया गया था। इस साल ब्रिक्स की अध्यक्षता कर रहे भारत के केंद्रीय बैंक, भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने व्यापार को आसान बनाने के लिए आधिकारिक डिजिटल मुद्राओं को जोड़ने का यह सुझाव दिया था।

तकनीकी और भू-राजनीतिक चुनौतियां

भले ही इस प्रस्ताव को एजेंडे में शामिल किया गया हो, लेकिन इसे लागू करने की राह आसान नहीं है। दुनिया भर में सेंट्रल बैंक डिजिटल करेंसी (CBDC) का सीमित इस्तेमाल इसके क्रियान्वयन में बड़ी बाधा बन सकता है। इसके अलावा, अलग-अलग वित्तीय ढांचे वाले देशों को जोड़ना तकनीकी, नियामकीय और राजनीतिक रूप से एक जटिल प्रक्रिया रही है।

कुछ सदस्य देशों के बीच के भू-राजनीतिक तनाव भी इस राह को मुश्किल बना सकते हैं। ईरान और यूएई के बीच के मतभेद इसका एक बड़ा उदाहरण हैं, क्योंकि यूएई ने ईरान के साथ अपने वित्तीय संबंध तोड़ लिए हैं।

भारत-चीन वित्तीय संबंध और डॉलर पर निर्भरता

भारत का चीन के साथ वित्तीय एकीकरण को लेकर सतर्क रुख भी एक और चुनौती पेश कर सकता है। इस तरह की व्यवस्था के लिए दोनों देशों के बीच गहरे भरोसे की जरूरत होगी। भारत ने पहले राष्ट्रीय सुरक्षा चिंताओं का हवाला देते हुए चीन के अलीपे (Alipay) को देश के इंस्टेंट पेमेंट सिस्टम से जोड़ने के प्रस्ताव को रोक दिया था।

नेटवर्क को पूरी तरह चालू करने से पहले व्यापार असंतुलन को दूर करने के लिए करेंसी-स्वैप व्यवस्थाओं की भी आवश्यकता पड़ सकती है। डॉलर पर निर्भरता कम करने के लिए ब्रिक्स देश पहले भी विकल्प तलाशते रहे हैं। हालांकि ब्राजील के एक साझा मुद्रा के प्रस्ताव पर बहुत अधिक प्रगति नहीं हुई थी, और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने भी ऐसी किसी पहल का समर्थन करने वाले देशों पर भारी टैरिफ लगाने की चेतावनी दी थी।

भारत ने स्पष्ट किया है कि उसका उद्देश्य अमेरिकी डॉलर को रिप्लेस करना नहीं है। रिजर्व बैंक और सरकार का मुख्य जोर इस तकनीकी एकीकरण के जरिए केवल सीमा पार के भुगतानों को तेज, आसान और सुगम बनाना है।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

ब्रिक्स देशों के बीच CBDC को जोड़ने का प्रस्ताव किसने रखा है?

भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने ब्रिक्स देशों के बीच क्रॉस-बॉर्डर ट्रेड को समर्थन देने के लिए आधिकारिक डिजिटल मुद्राओं (CBDCs) को आपस में जोड़ने का प्रस्ताव रखा है।

ब्रिक्स शिखर सम्मेलन 2025 का आयोजन कहाँ और कब हो रहा है?

इस साल ब्रिक्स की अध्यक्षता कर रहा भारत, 12 से 13 सितंबर को नई दिल्ली में समूह के नेताओं के शिखर सम्मेलन की मेजबानी कर रहा है।

CBDC लिंकेज के सामने क्या मुख्य चुनौतियां हैं?

दुनिया भर में CBDC का सीमित इस्तेमाल, तकनीकी और नियामकीय अंतर, तथा ईरान-यूएई और भारत-चीन के बीच भू-राजनीतिक तनाव इस प्रक्रिया में मुख्य बाधाएं हैं।

क्या भारत अमेरिकी डॉलर को रिप्लेस करना चाहता है?

नहीं, भारत ने स्पष्ट किया है कि उसका उद्देश्य अमेरिकी डॉलर को हटाना नहीं है, बल्कि डिजिटल मुद्राओं के जरिए क्रॉस-बॉर्डर पेमेंट को तेज और प्रभावी बनाना है।