छिंदवाड़ा जिले के बाम्हनवाड़ा गांव के प्राथमिक स्कूल में सेवानिवृत्ति का एक ऐसा क्षण आया, जिसने हर किसी को भावुक कर दिया। सहायक शिक्षक महतलाल बिझोरिया ने अपने 33 साल से अधिक लंबे सेवाकाल के बाद इसी स्कूल से रिटायरमेंट लिया। जिस विद्यालय में उन्होंने अपने करियर की शुरुआत की थी, वहीं से उनकी विदाई हुई। अपने प्रिय शिक्षक को जाते देख बच्चों के आंसू छलक पड़े और वे उनसे लिपटकर रोने लगे।
यह विदाई समारोह सिर्फ एक शिक्षक का फेयरवेल नहीं था, बल्कि तीन दशक से अधिक समय के उस समर्पण का गवाह था जो एक गुरु ने बच्चों के भविष्य को संवारने में लगाया। बच्चों की आंखें नम देख शिक्षक बिझोरिया भी अपने जज्बातों पर काबू नहीं रख सके।
कीचड़ भरे रास्तों से शुरू हुआ था सफर
मूल रूप से बीझावाड़ा के रहने वाले महतलाल बिझोरिया की नियुक्ति 3 जुलाई 1993 को बाम्हनवाड़ा प्राथमिक स्कूल में सहायक शिक्षक के रूप में हुई थी। उस दौर को याद करते हुए उन्होंने बताया कि तब वे चौरई से कीचड़ भरे रास्तों पर पैदल चलकर स्कूल पहुंचे थे। उस पहले दिन से ही उन्होंने इस विद्यालय को अपनी कर्मभूमि बना लिया था।
सरकारी सेवा में अमूमन तबादलों का दौर चलता रहता है, लेकिन बिझोरिया ने अपने पूरे करियर में कभी ट्रांसफर नहीं कराया। 31 अक्टूबर 2026 को रिटायर हुए बिझोरिया ने इस स्कूल में लगातार 33 साल 4 महीने सेवाएं दीं। इस दौरान उनकी तीन क्रमोन्नतियां हुईं, जिससे वेतन तो बढ़ा, लेकिन उनका कार्यस्थल यही प्राथमिक विद्यालय ही रहा।
'सर हमें छोड़कर मत जाइए...'
विदाई के दौरान सबसे मार्मिक पल तब आया जब स्कूल के बच्चे अपने गुरुजी से लिपट गए। बच्चों का कहना था कि वे सिर्फ शिक्षक नहीं, बल्कि परिवार के मुखिया की तरह उनका ध्यान रखते थे। गलती करने पर डांटने के साथ ही उनका दुलार भी उतना ही मिलता था। बच्चों का यह प्रेम और रोता हुआ चेहरा देखकर वहां मौजूद ग्रामीणों और शिक्षकों की भी आंखें नम हो गईं।
संकुल प्राचार्य राजेश चंद्रवंशी के मुताबिक, एमएल बिझोरia ने 33 साल 3 महीने और 28 दिन एक ही विद्यालय में बिताए। उन्होंने कहा कि ऐसा समर्पण और सादगी बहुत कम देखने को मिलती है। अपने शांत और सरल स्वभाव के चलते अपने पूरे सेवाकाल में उन्हें कभी ग्रामीणों की किसी शिकायत का सामना नहीं करना पड़ा।
