छिंदवाड़ा में राष्ट्र सेविका समिति की स्थापना के 90 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में विजयादशमी उत्सव का आयोजन किया गया। इस ऐतिहासिक अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में सेविकाओं ने शारीरिक दक्षता, अनुशासन और सांस्कृतिक गतिविधियों का प्रदर्शन किया।
वर्ष 1936 में विजयादशमी के दिन स्थापित हुई इस समिति के 90 वर्षों के सफर को रेखांकित करते हुए नगर में विभिन्न कार्यक्रमों की श्रृंखला रखी गई।
रामरक्षा स्तोत्र पाठ से शुरुआत और योग प्रदर्शन
कार्यक्रम की शुरुआत पारंपरिक रूप से रामरक्षा स्तोत्र के पाठ के साथ हुई। इसके बाद मंच पर सेविकाओं ने योगासन, नियुद्ध, अभिनय गीत, योगचाप और सूर्य नमस्कार जैसी विभिन्न शारीरिक गतिविधियों का प्रदर्शन किया। इन प्रस्तुतियों के जरिए बालिकाओं और महिलाओं में अनुशासन, आत्मविश्वास और शारीरिक क्षमता का संदेश दिया गया।
छह वर्ष की आयु से जुड़ने का अवसर
कार्यक्रम में राष्ट्र सेविका समिति की वरिष्ठ सेविका किरण आठले ने समिति की कार्यप्रणाली और इसकी नौ दशकों लंबी यात्रा पर विस्तार से बात की।
किरण आठले ने कहा- "समिति के कार्यों से जुड़कर बालिकाएं और महिलाएं शारीरिक, मानसिक और सामाजिक रूप से सशक्त बनने की दिशा में आगे बढ़ सकती हैं।"
उन्होंने आगे बताया कि समिति की गतिविधियों में छह वर्ष की आयु के बच्चे भी हिस्सा ले सकते हैं। कम उम्र से ही बच्चों में अनुशासन, योग और संस्कारों के प्रति रुचि विकसित करने के उद्देश्य से यह व्यवस्था रखी गई है।
सेवा और संस्कार का नौ दशक का सफर
राष्ट्र सेविका समिति की यह 90 वर्षों की यात्रा सेवा, संस्कार और संगठन के माध्यम से समाज में सकारात्मक बदलाव लाने के उद्देश्य को आगे बढ़ा रही है। छिंदवाड़ा में हुए इस विजयादशमी उत्सव के जरिए संगठन की कार्यशैली और उसके विस्तार को एक बार फिर प्रदर्शित किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में सेविकाएं शामिल हुईं।
