Saturday, 26 September 2026
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एशियन गेम्स: भारत ने कबड्डी में जीते दोनों गोल्ड, सावन बरवाल ने 44 साल बाद मैराथन में जीता सिल्वर

संक्षेप में

एशियन गेम्स में भारत ने पुरुष और महिला कबड्डी दोनों के फाइनल में ईरान को हराकर स्वर्ण पदक जीते। इसके अलावा सावन बरवाल ने पुरुष मैराथन में 44 साल बाद सिल्वर मेडल जीता और स्क्वॉश में अनाहत व अभय सिंह ने सिंगल्स के फाइनल में पहुंचकर इतिहास रचा।

मुख्य बातें

  • महिला कबड्डी टीम ने फाइनल में ईरान को 37-34 से हराया।
  • पुरुष कबड्डी टीम ने ईरान को 40-34 से हराकर लगातार 10वीं बार मेडल जीता।
  • सावन बरवाल ने पुरुष मैराथन में 2 घंटे 11 मिनट 37 सेकंड का समय निकालकर सिल्वर मेडल जीता।
  • एशियन गेम्स की पुरुष मैराथन में भारत को 44 साल बाद मेडल मिला है।
खेल
एशियन गेम्स: भारत ने कबड्डी में जीते दोनों गोल्ड, सावन बरवाल ने 44 साल बाद मैराथन में जीता सिल्वर

भारतीय खिलाड़ियों ने एशियन गेम्स में ऐतिहासिक प्रदर्शन करते हुए एक ही दिन में कबड्डी के दोनों स्वर्ण पदक अपने नाम कर लिए। पुरुष और महिला दोनों टीमों ने फाइनल मुकाबलों में ईरान को मात दी। पुरुष वर्ग में भारत ने 40-34 से जीत दर्ज कर लगातार 10वीं बार एशियाड में मेडल जीता, जबकि महिला टीम ने ईरान को 37-34 से हराकर लगातार पांचवीं बार पोडियम पर कब्जा जमाया।

इस ऐतिहासिक सफलता के बीच, एथलेटिक्स और स्क्वॉश में भी देश के खिलाड़ियों ने बड़े मुकाम हासिल किए। पुरुष मैराथन में सावन बरवाल ने सिल्वर मेडल जीतकर 44 साल का सूखा खत्म किया, वहीं स्क्वॉश कोर्ट पर अनाहत सिंह और अभय सिंह ने सिंगल्स के फाइनल में पहुंचकर नया इतिहास रचा।

पुरुष कबड्डी फाइनल: हाफटाइम में पिछड़े, फिर ऐसे पलटा मैच

पुरुष कबड्डी के खिताबी मुकाबले में ईरान ने शुरुआत से ही आक्रामक रुख अपनाया। पहले हाफ के आखिर तक ईरान ने 18-17 की मामूली बढ़त बना ली थी। दूसरे हाफ की शुरुआत में भी भारतीय टीम पर दबाव बना रहा और स्कोर 21-21 की बराबरी पर आ गया था।

मैच के इस नाजुक मोड़ पर सुमित ने डिफेंस में लगातार सफल टैकल किए, जबकि रेडिंग में अर्जुन देशवाल ने तेजी से अंक जुटाकर ईरान की रक्षा पंक्ति को ध्वस्त कर दिया। इसके बाद भारतीय टीम ने पीछे मुड़कर नहीं देखा और अंततः 40-34 के अंतर से मुकाबला जीतकर गोल्ड मेडल अपने गले में डाला। इस जीत के साथ ही पुरुष टीम ने एशियन गेम्स में अपनी बादशाहत बरकरार रखते हुए लगातार 10वीं बार मेडल जीता है।

महिला टीम ने भी ईरान को दी मात

दिन के पहले मुकाबले में भारतीय महिला कबड्डी टीम ने भी ईरान के खिलाफ कड़े संघर्ष में बाजी मारी। मुकाबला रोमांचक मोड़ पर चला जहां भारत ने शुरुआत में बढ़त बनाई, लेकिन ईरानी खिलाड़ियों ने लगातार वापसी की कोशिश की।

मैच के आखिरी मिनटों में भारतीय डिफेंस ने संयम दिखाते हुए कोई गलती नहीं की और स्कोर 37-34 पर रोक दिया। इस जीत के साथ महिला टीम ने लगातार पांचवें एशियाड में देश के लिए मेडल हासिल किया।

स्क्वॉश में पहली बार दोहरी सफलता

कबड्डी के अलावा स्क्वॉश कोर्ट पर भारत ने अनूठा इतिहास रचा। 18 साल की युवा खिलाड़ी अनाहत सिंह ने विमेंस सिंगल्स के सेमीफाइनल में जापान की वर्ल्ड नंबर-6 सातोमी वतनाबे को 3-2 से हराकर फाइनल में प्रवेश किया। अनाहत एक समय मैच में 2-0 से पीछे चल रही थीं और तीसरे गेम में उन्हें दो मैच पॉइंट भी बचाने पड़े थे, लेकिन उन्होंने शानदार वापसी करते हुए मुकाबला अपने नाम किया।

दूसरी ओर, अभय सिंह ने मेंस सिंगल्स के सेमीफाइनल में पाकिस्तान के मुहम्मद इरफान को सीधे गेमों में 11-3, 12-10, 11-6 से शिकस्त दी। यह पहला मौका है जब एशियन गेम्स के इतिहास में भारत के दो खिलाड़ी सिंगल्स कैटेगरी के फाइनल में पहुंचे हैं।

मैराथन में 44 साल बाद मेडल

एथलेटिक्स स्पर्धा में सावन बरवाल ने पुरुष मैराथन में शानदार प्रदर्शन करते हुए सिल्वर मेडल जीता। उन्होंने 42 किलोमीटर की इस कठिन दौड़ को 2 घंटे 11 मिनट 37 सेकंड में पूरा किया।

एशियन गेम्स की पुरुष मैराथन में भारत को चार दशक से अधिक समय के बाद पदक मिला है। इससे पहले 1982 के दिल्ली एशियन गेम्स में भारत ने इस इवेंट में ब्रॉन्ज मेडल जीता था।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

एशियन गेम्स में भारतीय पुरुष कबड्डी टीम ने किसे हराया?

भारतीय पुरुष कबड्डी टीम ने फाइनल में ईरान को 40-34 से हराकर स्वर्ण पदक जीता।

महिला कबड्डी टीम ने फाइनल में किस स्कोर से जीत दर्ज की?

महिला कबड्डी टीम ने फाइनल में ईरान को 37-34 के अंतर से हराकर गोल्ड मेडल अपने नाम किया।

पुरुष मैराथन में भारत को कितने साल बाद मेडल मिला है?

पुरुष मैराथन में सावन बरवाल ने सिल्वर मेडल जीतकर भारत को 44 साल बाद इस इवेंट में पदक दिलाया है।

स्क्वॉश सिंगल्स के फाइनल में पहुंचने वाले भारतीय खिलाड़ी कौन हैं?

अनाहत सिंह (विमेंस सिंगल्स) और अभय सिंह (मेन्स सिंगल्स) ने फाइनल में जगह बनाई है, जो एशियन गेम्स के इतिहास में पहली बार हुआ है।