Saturday, 26 September 2026
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होटल का फ्री वाई-फाई दे रहा है साइबर ठगों को दावत; माइक्रोसॉफ्ट की चेतावनी से बड़ा खुलासा

संक्षेप में

माइक्रोसॉफ्ट की रिपोर्ट के अनुसार, हैकर्स अब होटलों और कॉन्फ्रेंस हॉलों के फ्री वाई-फाई के कैप्टिव पोर्टल के जरिए CaptiveCrunch (Storm-2945) हमला कर रहे हैं। फेक सॉफ्टवेयर अपडेट के बहाने डिवाइस में मैलवेयर डालकर बैंक डिटेल, पासवर्ड और पर्सनल डेटा चोरी किया जा रहा है।

मुख्य बातें

  • माइक्रोसॉफ्ट ने होटलों के फ्री वाई-फाई से डेटा चोरी का नया खतरा उजागर किया है।
  • इस साइबर हमले को CaptiveCrunch (Storm-2945) नाम दिया गया है।
  • हैकर्स कैप्टिव पोर्टल के जरिए इंटरनेट ट्रैफिक रोककर फेक सॉफ्टवेयर अपडेट का पॉप-अप दिखाते हैं।
  • मैलवेयर के जरिए नेट बैंकिंग पासवर्ड, UPI पिन और पर्सनल फोटो चोरी हो सकती हैं।
  • बचाव के लिए वीपीएन (VPN) का इस्तेमाल करने और वाई-फाई पर सॉफ्टवेयर अपडेट प्रॉम्प्ट को रद्द करने की सलाह दी गई है।
तकनीकी
होटल का फ्री वाई-फाई दे रहा है साइबर ठगों को दावत; माइक्रोसॉफ्ट की चेतावनी से बड़ा खुलासा

होटल के कमरे में दाखिल होते ही मोबाइल डेटा बचाने के लिए फ्री वाई-फाई से कनेक्ट होना भारी पड़ सकता है। टेक दिग्गज माइक्रोसॉफ्ट की एक नई रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि हैकर्स अब होटलों और कॉन्फ्रेंस हॉलों के वाई-फाई नेटवर्क के जरिए लोगों का पर्सनल डेटा और बैंक खातों की जानकारी चुरा रहे हैं। साइबर ठगों का यह नया पैंतरा यात्रियों की जरा सी लापरवाही पर भारी पड़ रहा है।

कैप्टिव पोर्टल से कैसे होता है खेल

माइक्रोसॉफ्ट की इस रिपोर्ट में इस साइबर हमले को 'CaptiveCrunch (Storm-2945)' नाम दिया गया है। आमतौर पर होटल के वाई-फाई से कनेक्ट होने पर स्क्रीन पर एक पेज खुलता है, जिसमें कमरा नंबर, नाम या मोबाइल नंबर दर्ज करना होता है। इसे तकनीकी भाषा में कैप्टिव पोर्टल कहा जाता है। हैकर्स इसी पोर्टल को अपना हथियार बना रहे हैं। जैसे ही कोई यात्री इस पेज पर लॉगइन करने की कोशिश करता है, साइबर अपराधी उसके इंटरनेट ट्रैफिक को बीच में ही रोक लेते हैं।

इसके बाद यूजर की स्क्रीन पर एक फेक पॉप-আপ या मैसेज फ्लैश होता है। इस मैसेज में दावा किया जाता है कि यूजर का गूगल क्रोम या विंडोज ब्राउजर अपडेट होना बाकी है। जैसे ही कोई व्यक्ति उस अपडेट बटन पर क्लिक करता है, उसके डिवाइस में एक खतरनाक मैलवेयर डाउनलोड हो जाता है। इसके साथ ही पूरा फोन या लैपटॉप सीधे हैकर्स के सर्वर के कंट्रोल में चला जाता है।

क्या-क्या चुरा लेते हैं हैकर्स

डिवाइस में मैलवेयर घुसते ही हैकर्स यूजर की हर एक्टिविटी पर पैनी नजर रखने लगते हैं। इससे नेट बैंकिंग के पासवर्ड, क्रेडिट और डेबिट कार्ड के नंबर, और यूपीआई पिन तक आसानी से चुरा लिए जाते हैं। इसके अलावा फेसबुक, इंस्टाग्राम और ईमेल अकाउंट्स की लॉगिन डिटेल भी खतरे में पड़ जाती है। इस मैलवेयर के जरिए फोन में मौजूद पर्सनल फोटो, वीडियो और जरूरी दस्तावेज भी सीधे साइबर अपराधियों के पास पहुंच जाते हैं।

खुद को इस जाल से कैसे बचाएं

साइबर एक्सपर्ट्स का कहना है कि इससे बचने का सबसे सुरक्षित तरीका यही है कि होटल के वाई-फाई का इस्तेमाल ही न किया जाए और अपने मोबाइल डेटा का उपयोग किया जाए। अगर वाई-फाई इस्तेमाल करना बेहद जरूरी है, तो फोन में एक अच्छा वीपीएन (VPN) ऐप जरूर चालू रखें। वीपीएन ऑन होने से डेटा पूरी तरह एन्क्रिप्ट और सुरक्षित हो जाता है, जिसे हैकर्स पढ़ नहीं पाते। साथ ही, वाई-फाई इस्तेमाल करते वक्त अगर कोई भी ब्राउजर या सॉफ्टवेयर अपडेट करने का प्रॉम्प्ट आए, तो उसे तुरंत कैंसल कर दें।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

होटल का फ्री वाई-फाई इस्तेमाल करना खतरनाक क्यों है?

माइक्रोसॉफ्ट की रिपोर्ट के मुताबिक, हैकर्स अब होटलों के फ्री वाई-फाई के कैप्टिव पोर्टल को हैक करके मैलवेयर फैला रहे हैं, जिससे बैंक डिटेल, पासवर्ड और पर्सनल डेटा चोरी हो सकता है।

CaptiveCrunch (Storm-2945) क्या है?

यह एक नया साइबर हमला है जिसमें हैकर्स होटल के वाई-फाई लॉगिन पेज (कैप्टिव पोर्टल) को हाईजैक कर लेते हैं और फेक सॉफ्टवेयर अपडेट के जरिए यूजर के डिवाइस में मैलवेयर इंस्टॉल कर देते हैं।

होटल के वाई-फाई पर हैकर्स से खुद को कैसे बचाएं?

इससे बचने के लिए होटल के वाई-फाई की जगह मोबाइल डेटा का उपयोग करें। यदि वाई-फाई जरूरी हो, तो वीपीएन (VPN) का इस्तेमाल करें और किसी भी फेक अपडेट प्रॉम्प्ट पर क्लिक न करें।

वाई-फाई हैक होने पर हैकर्स क्या चुरा सकते हैं?

डिवाइस का कंट्रोल मिलने के बाद हैकर्स नेट बैंकिंग पासवर्ड, यूपीआई पिन, सोशल मीडिया अकाउंट्स की डिटेल और फोन में मौजूद पर्सनल तस्वीरें व दस्तावेज चुरा सकते हैं।