चीन में विदेशियों की निगरानी के लिए बनाए गए एक सीक्रेट डेटाबेस का खुलासा हुआ है। साइबर सिक्योरिटी रिसर्च मार्कस होफर को एक वेबसाइट पर अपनी ही पासपोर्ट डिटेल और फोटो मिली, जिसके बाद इस सर्विलांस सिस्टम की पोल खुली।
अस्पताल से लेकर गैस बिल तक पर नजर
'डाइनामिक कंट्रोल प्लेटफॉर्म फॉर ओवरसीज पर्सनल' नाम के इस पोर्टल में झांगजियाकोउ शहर में रहने वाले 700 से ज्यादा विदेशियों समेत करीब 12,000 एंट्री दर्ज थीं। इस डेटाबेस में विदेशियों की हर गतिविधि का कच्चा-चिट्ठा मौजूद था।
सिस्टम में दर्ज डेटा के मुताबिक, अधिकारी यह तक ट्रैक कर रहे थे कि विदेशी नागरिकों ने किस फ्लाइट या ट्रेन में सफर किया, उनकी सीट कौन सी थी, वे कब डॉक्टर के पास गए और उन्होंने गैस बिल के रूप में कितना भुगतान किया। इसके अलावा स्की रिसॉर्ट के विजीटर रिकॉर्ड और फेस-स्कैनिंग कैमरों की फीड भी इसमें जोड़ी गई थी।
चीनी फर्म से जुड़े तार
द न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, इस प्लेटफॉर्म के तार बीजिंग की एक फर्म 'ऑरिजिन डाइनामिक' से जुड़े हैं। यह कंपनी पुलिस विभागों को रोबोटिक्स और सर्विलांस उपकरण बेचती है। साल 2023 में इसी कंपनी ने गैर-चीनी नागरिकों के लिए ऐसा ही एक 'इंफॉर्मेशन इंटरफेस' पेटेंट कराया था। इस कंपनी की आंशिक हिस्सेदारी जियांगसू प्रांत के यानचेंग शहर के स्थानीय सरकारी अधिकारियों के पास है।
अलग-अलग कैटेगरी में निगरानी
डेटाबेस में विदेशियों को खास श्रेणियों में बांटा गया था। ऑस्ट्रेलिया, कनाडा, न्यूजीलैंड, ब्रिटेन और अमेरिका के नागरिकों को 'फाइव आईज एलायंस' के तहत रखा गया था, जबकि मिस्र, ईरान, इजरायल, मोरक्को, पाकिस्तान और ताइवान के लोगों के लिए अलग फोल्डर थे। इसके अलावा हांगकांग के नागरिकों, विदेशी छात्रों और 'की पर्सन्स' (संदिग्ध या एक्टिविस्ट) की अलग लिस्ट तैयार की गई थी।
झांगजियाकोउ के हेबेई नॉर्थ यूनिवर्सिटी में पढ़ने वाले पाकिस्तानी और भारतीय छात्रों के रिकॉर्ड भी इसमें शामिल थे, जिनमें उनके धर्म, वैवाहिक स्थिति और कैंपस में एंट्री का सटीक समय दर्ज था। हालांकि, यह डेटाबेस खुला हुआ था और लॉगिन क्रेडेंशियल पहले से दर्ज मिले थे, लेकिन मई तक यह वेबसाइट पूरी तरह गायब हो चुकी थी।
