लोकसभा नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के 19 सितंबर को इंदौर में होने वाले 'छात्रों की गूंज' कार्यक्रम को लेकर प्रशासनिक और राजनीतिक खींचतान तेज हो गई है। कार्यक्रम के स्थल, शुल्क और सुरक्षा शर्तों को लेकर कांग्रेस और प्रशासन आमने-सामने आ गए हैं।

मूल रूप से यह आयोजन 12 सितंबर को नेहरू स्टेडियम में प्रस्तावित था, लेकिन जिला प्रशासन ने अनुमति नहीं दी। इसके बाद कांग्रेस ने तारीख बदलकर 19 सितंबर तय की और रीजनल पार्क के सामने इंदौर विकास प्राधिकरण (IDA) के मैदान को चुना। मैदान के शुल्क को लेकर अतिरिक्त भुगतान का मामला सामने आया और आईडीए ने आयोजन के लिए पांच शर्तें थोप दीं।

पुलिस की 31 शर्तें और राजीव गांधी की सुरक्षा का हवाला

मामला तब और गर्माया जब पुलिस ने आयोजन के लिए 31 सुरक्षा शर्तें रख दीं। पुलिस ने इन शर्तों के साथ पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की हत्या के समय हुई सुरक्षा चूकों का भी जिक्र किया, जिससे राजनीतिक हलकों में चर्चाएं तेज हो गईं।

प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने इन तमाम घटनाक्रमों को विपक्ष की आवाज दबाने का सुनियोजित प्रयास बताया है। उन्होंने आरोप लगाया कि जैसे ही कार्यक्रम की घोषणा हुई, भाजपा की तरफ से तरह-तरह की बाधाएं खड़ी की जाने लगीं।

देश के अन्य शहरों में भी अड़चनों का दावा

कांग्रेस नेताओं का कहना है कि देश के जिन भी शहरों में 'छात्रों की गूंज' कार्यक्रम आयोजित किए गए हैं, वहां किसी न किसी स्तर पर प्रशासन की ओर से अड़चनें पैदा की गईं।

इन तमाम पाबंदियों और शर्तों के बावजूद प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने स्पष्ट किया है कि पार्टी इंदौर पुलिस की सभी 31 शर्तों का पूरी तरह पालन करेगी, ताकि कार्यक्रम में कोई बाधा न आए।

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