भारत और जापान ने अपनी आर्थिक साझेदारी को और मजबूत करते हुए कई अहम फैसले लिए हैं, जिससे दोनों देशों के बीच निवेश, उत्पादन और तकनीक के क्षेत्र में सहयोग को नई गति मिलने की उम्मीद जताई जा रही है। भारत-जापान जॉइंट इकोनोमिक फोरम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि आज दुनिया में बिकने वाली सुजुकी की लगभग दो-तिहाई कारें भारत में बन रही हैं और इन्हें 100 से ज्यादा देशों में निर्यात किया जा रहा है, जो भारत के मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर की बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है। इस मौके पर उन्होंने जापानी कंपनियों की समस्याओं को तेजी से हल करने के लिए ‘जापान बिजनेस वीक’ शुरू करने की घोषणा की, जिसके तहत प्रधानमंत्री कार्यालय के वरिष्ठ अधिकारी सीधे जापानी निवेशकों से संवाद करेंगे ताकि निवेश प्रक्रिया को और आसान बनाया जा सके।

इस दौरान जापान की प्रधानमंत्री साने ताकाइची ने भारत के साथ सहयोग को और गहरा करने की बात कही और बताया कि जापान के सहयोग से भारत में करीब 1000 खाद कारखाने स्थापित करने प्लान है। साथ ही दोनों देशों ने अगले 10 वर्षों में भारत में 10 ट्रिलियन येन के जापानी निवेश का लक्ष्य तय किया है, जिसे आर्थिक साझेदारी के एक बड़े विस्तार के रूप में देखा जा रहा है। इस कार्यक्रम के चलते हरियाणा के खरखौदा में मारुति सुजुकी के चौथे वाहन निर्माण संयंत्र का उद्घाटन भी किया गया, जो भारत में ऑटोमोबाइल सेक्टर की बढ़ती ताकत को दर्शाता है।

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कार्यक्रम में अपने संबोधन की शुरुआत में साने ताकाइची को अपनी ‘छोटी बहन’ कहकर संबोधित किया और भारत-जापान संबंधों को भरोसे, तकनीक और उत्पादन क्षमता के मजबूत मेल के रूप में बताया। उन्होंने कहा कि दोनों देशों की साझेदारी न सिर्फ भारत और जापान के लिए बल्कि पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था के लिए फायदेमंद साबित होने वाली मानी जाएगी।