Tuesday, 27 October 2026
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जयपुर में 13 साल पुरानी शादी खत्म: पत्नी ने पराए शख्स के लिए रखा करवा चौथ, गोवा में लिए फेरे; फैमिली कोर्ट ने दी तलाक की मंजूरी

संक्षेप में

जयपुर की फैमिली कोर्ट-2 ने 13 साल पुरानी शादी को खत्म कर दिया है। अदालत ने पत्नी द्वारा किसी अन्य पुरुष के लिए करवा चौथ रखने, गोवा में फेरे लेने और पति को मानसिक प्रताड़ना देने के मामलों को आधार बनाते हुए तलाक की अर्जी मंजूर कर ली।

मुख्य बातें

  • जयपुर की फैमिली कोर्ट-2 ने 13 साल पुरानी शादी को खत्म किया।
  • पत्नी ने पराए शख्स के लिए करवा चौथ रखा और गोवा में फेरे लिए थे।
  • अदालत ने इसे पति के प्रति मानसिक क्रूरता माना।
  • पति-पत्नी का विवाह मई 2013 में हुआ था।
जयपुर संभाग
जयपुर में 13 साल पुरानी शादी खत्म: पत्नी ने पराए शख्स के लिए रखा करवा चौथ, गोवा में लिए फेरे; फैमिली कोर्ट ने दी तलाक की मंजूरी

जयपुर की फैमिली कोर्ट-2 ने 13 साल पुरानी शादी को खत्म करने का आदेश दिया है। अदालत ने माना कि पत्नी का किसी अन्य पुरुष के साथ संबंध रखना और उसके लिए रीति-रिवाज निभाना वैवाहिक मर्यादा के खिलाफ है। पति की याचिका पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने इसे मानसिक क्रूरता माना और तलाक की अर्जी मंजूर कर ली।

पति-पत्नी का यह विवाह मई 2013 में हुआ था। इसके बाद से दोनों के बीच संबंध सामान्य नहीं रहे। पति ने पारिवारिक जीवन में आ रही मुश्किलों और अन्य गंभीर वजहों का हवाला देते हुए फैमिली कोर्ट में तलाक की अर्जी दाखिल की थी।

पराए शख्स के लिए करवा चौथ और गोवा में फेरे

सुनवाई के दौरान अदालत के सामने ऐसे तथ्य आए, जिन्होंने इस मामले को सामान्य पारिवारिक विवाद से अलग कर दिया। सामने आया कि महिला ने अपने पति के होने के बावजूद किसी अन्य पुरुष के लिए करवा चौथ का व्रत रखा और हाथों में उसके नाम की मेहंदी भी लगाई।

यही नहीं, महिला ने गोवा जाकर उस व्यक्ति के साथ फेरे भी लिए थे। अदालत ने इन घटनाओं पर कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा कि शादीशुदा रहते हुए इस तरह के धार्मिक और सामाजिक अनुष्ठान किसी अन्य व्यक्ति के लिए करना सामान्य दोस्ती की सीमा से बहुत आगे की बात है। कोर्ट ने इसे वैवाहिक जीवन के भरोसे पर सीधा आघात माना।

लंबे समय तक दूरी और मानसिक क्रूरता

अदालत की कार्यवाही में यह बात भी स्पष्ट हुई कि पत्नी ने पति को लंबे समय तक दांपत्य जीवन का सुख नहीं दिया। पति-पत्नी के बीच लगातार दूरी बनी रही और महिला ने वैवाहिक जिम्मेदारियों से किनारा कर लिया।

न्यायालय के मुताबिक, इस तरह की दूरी और अन्य घटनाक्रम सीधे तौर पर पति के लिए मानसिक प्रताड़ना का कारण बने। कोर्ट ने इसे मानसिक क्रूरता की श्रेणी में रखा, जिसके बाद रिश्ते को आगे खींचना मुमकिन नहीं था।

बेटे की देखभाल और परिजनों से व्यवहार पर भी सवाल

इस मामले में सिर्फ पति-पत्नी के आपसी रिश्ते ही नहीं, बल्कि परिवार के अन्य पहलुओं पर भी अदालत ने गौर किया। सुनवाई में सामने आया कि महिला ने अपने नाबालिग बेटे की उचित देखभाल नहीं की।

इसके अलावा, पति के माता-पिता यानी सास-ससुर के प्रति उसका रवैया अनुचित और अपमानजनक रहा। अदालत ने इन सभी बिंदुओं को आधार बनाते हुए निष्कर्ष निकाला कि ऐसी परिस्थितियों में पति के लिए मानसिक शांति के साथ वैवाहिक रिश्ता निभा पाना संभव नहीं रह गया था। तमाम साक्ष्यों और पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने 13 साल पुराने इस रिश्ते को कानूनी रूप से समाप्त कर दिया।

 

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

जयपुर में फैमिली कोर्ट ने किस मामले में तलाक की मंजूरी दी?

जयपुर की फैमिली कोर्ट-2 ने 13 साल पुरानी शादी को खत्म करने का आदेश दिया है, जहां पत्नी के पराए पुरुष के साथ संबंध और उसके लिए करवा चौथ रखने का मामला सामने आया था।

पति-पत्नी की शादी कब हुई थी?

पति और पत्नी का विवाह मई 2013 में हुआ था, जिसके बाद पति ने फैमिली कोर्ट में तलाक की अर्जी दाखिल की थी।

अदालत ने फैसले में किन मुख्य बातों का जिक्र किया?

अदालत ने पत्नी द्वारा गोवा में फेरे लेने, पराए शख्स के नाम की मेहंदी लगाने, लंबे समय तक दांपत्य सुख नहीं देने और ससुराल पक्ष के साथ दुर्व्यवहार को मानसिक क्रूरता माना।