Thursday, 22 October 2026
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ज्योतिष और वास्तु परामर्श: पत्रकारिता की पढ़ाई से लेकर फलादेश तक, जानें प्रयाग भास्कर का सफर

संक्षेप में

सवाई माधोपुर से ताल्लुक रखने वाले और जयपुर में सक्रिय प्रयाग भास्कर ने पत्रकारिता की पढ़ाई के बाद इग्नू से ज्योतिष की डिग्री ली। वे पराशरी सिद्धांत और लाल किताब के आधार पर ज्योतिष और वास्तु परामर्श देते हैं।

मुख्य बातें

  • प्रयाग भास्कर मूल रूप से सवाई माधोपुर के रहने वाले हैं और वर्तमान में जयपुर में परामर्श कार्य करते हैं।
  • उन्होंने पत्रकारिता में स्नातकोत्तर की पढ़ाई के बाद इग्नू से ज्योतिष में डिग्री हासिल की है।
  • वे अपने परामर्श कार्य में मुख्य रूप से पराशरी सिद्धांत और लाल किताब की पद्धतियों का उपयोग करते हैं।
जयपुर संभाग
ज्योतिष और वास्तु परामर्श: पत्रकारिता की पढ़ाई से लेकर फलादेश तक, जानें प्रयाग भास्कर का सफर

मानवीय रिश्तों की जटिलताओं और धोखे से जुड़े एक निजी अनुभव ने कैसे किसी को ज्योतिष की दुनिया में ला खड़ा किया, इसकी एक दिलचस्प कहानी है। मूल रूप से सवाई माधोपुर के रहने वाले और वर्तमान में जयपुर में सक्रिय प्रयाग भास्कर का ज्योतिष और वास्तु परामर्श का सफर किसी पूर्व निर्धारित पेशेवर योजना का हिस्सा नहीं था, बल्कि यह एक सवाल से शुरू हुई जिज्ञासा का परिणाम है।

पत्रकारिता में स्नातकोत्तर की शिक्षा और एक समाचार पत्र में कनिष्ठ स्तर पर काम करने के बाद उन्होंने इंदिरा गांधी राष्ट्रीय मुक्त विश्वविद्यालय (इग्नू) से ज्योतिष की औपचारिक डिग्री हासिल की। आज वे पारंपरिक पद्धतियों के जरिए लोगों को करियर, विवाह और संपत्ति से जुड़े विषयों पर मार्गदर्शन दे रहे हैं।

रिश्तों में अविश्वास से जगी ज्योतिष की जिज्ञासा

प्रयाग भास्कर के इस सफर की शुरुआत उस समय हुई जब उनके सामने एक संभ्रांत कॉलोनी की महिला से जुड़ी घटना आई। जमीन से जुड़े एक मामले में पति द्वारा महिला को धोखा दिए जाने की जानकारी मिलने पर उनके मन में यह सवाल उठा कि आखिर करीबी रिश्तों में विश्वास क्यों डगमगाता है।

इसी सवाल के जवाब तलाशने की प्रक्रिया उन्हें आध्यात्मिक और पारंपरिक मान्यताओं के करीब ले गई। उज्जैन के पंडित विजय जोशी से मुलाकात और जन्म कुंडली को लेकर हुई चर्चा ने उनकी इस रुचि को व्यवस्थित अध्ययन में बदल दिया।

पराशरी सिद्धांत और लाल किताब से फलादेश

परामर्श कार्य के दौरान वे मुख्य रूप से पराशरी सिद्धांत और लाल किताब की पद्धतियों का उपयोग करते हैं। उनके कार्यक्षेत्र में जन्म कुंडली का निर्माण, विवाह के लिए मिलान, करियर-कारोबार से जुड़े सवाल और नाड़ी दोष से जुड़े अनुष्ठान शामिल हैं।

इसके अलावा, आवासीय भवनों, भूखंडों और व्यावसायिक परिसरों के लिए वास्तु परामर्श भी उनकी सेवाओं का हिस्सा है। शुरुआती दौर में कम उम्र के कारण लोगों में संकोच की स्थिति भी रही, लेकिन अपने अध्ययन और संवाद के जरिए उन्होंने धीरे-धीरे लोगों का विश्वास जीता।

घर से ही अपने परामर्श कार्य की शुरुआत करने वाले प्रयाग भास्कर अब जयपुर में रहकर अपनी सेवाओं को और अधिक लोगों तक पहुंचाने की योजना पर काम कर रहे हैं। ज्योतिष और वास्तु से जुड़े इन पारंपरिक परामर्शों को हालांकि वैज्ञानिक रूप से प्रमाणित निष्कर्ष या निश्चित भविष्यवाणियां नहीं माना जाता, लेकिन व्यक्तिगत जीवन और निर्णयों में मार्गदर्शन के लिए इनकी मांग लगातार बनी हुई है।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

प्रयाग भास्कर कौन हैं और उनका संबंध कहां से है?

प्रयाग भास्कर जयपुर में ज्योतिष और वास्तु परामर्श देने वाले विशेषज्ञ हैं, जिनका पैतृक संबंध राजस्थान के सवाई माधोपुर जिले से है।

उन्होंने ज्योतिष के क्षेत्र में आने से पहले क्या पढ़ाई की थी?

ज्योतिष की ओर रुख करने से पहले उन्होंने पत्रकारिता में स्नातकोत्तर की शिक्षा प्राप्त की थी और एक समाचार पत्र में कनिष्ठ स्तर पर काम किया था।

प्रयाग भास्कर ने ज्योतिष की औपचारिक शिक्षा कहां से ली?

उन्होंने इंदिरा गांधी राष्ट्रीय मुक्त विश्वविद्यालय (इग्नू) से ज्योतिष विषय में डिग्री हासिल की है।

वे मुख्य रूप से किन पद्धतियों के आधार पर परामर्श देते हैं?

वे मुख्य रूप से पराशरी सिद्धांत और लाल किताब की पद्धतियों के आधार पर जन्म कुंडली और फलादेश तैयार करते हैं।