जयपुर के विद्याधर नगर स्टेडियम में राष्ट्रीय करणी सेना के नेतृत्व में आयोजित सवर्ण आक्रोश सभा के दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच तीखी तनातनी देखने को मिली। यूजीसी की नई गाइडलाइन वापस लेने और आरक्षण में सुधार समेत कई मांगों को लेकर जुटे लोगों ने हाइवे जाम करने की चेतावनी दी थी। हालांकि, प्रशासनिक अधिकारियों के साथ हुई दौर की बातचीत के बाद सहमति बन गई, जिसके बाद पिछले आठ दिनों से भूख हड़ताल पर बैठी महिला विंग की अध्यक्ष का अनशन जूस पिलाकर खत्म कराया गया।
यह विरोध प्रदर्शन विद्याधर नगर स्टेडियम परिसर में आयोजित हुआ, जहां करणी सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष सूरजपाल सिंह अम्मू, शिव सिंह शेखावत, ओकेंद्र सिंह राणा, अनिल चतुर्वेदी, सुनील उदईया और हर्ष दुबे ने मंच से सभा को संबोधित किया। वक्ताओं ने सरकार को अल्टीमेटम देते हुए कहा कि यदि सवर्ण समाज की मांगों पर समय रहते विचार नहीं किया गया, तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा। सभा के दौरान मंच से हनुमान चालीसा का पाठ भी किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में समाज के लोग शामिल हुए।
आठ दिन से अनशन पर बैठीं लक्ष्मी तंवर ने तोड़ा व्रत
संगठन की महिला विंग की अध्यक्ष लक्ष्मी तंवर अपनी मांगों को लेकर पिछले आठ दिनों से क्रमिक अनशन पर थीं। उनका अनशन जयपुर (उत्तर) डीसीपी करण शर्मा और एडिशनल डीसीपी बजरंग सिंह शेखावत ने मौके पर पहुंचकर जूस पिलाकर तुड़वाया।
इससे पहले दोपहर के वक्त जब प्रशासन के साथ वार्ता किसी नतीजे पर नहीं पहुंची, तो आक्रोशित लोग स्टेडियम से बाहर निकलकर हाइवे की ओर बढ़ने लगे। पुलिस बल ने बैरिकेडिंग लगाकर उन्हें रोक लिया। इस दौरान पुलिस और सुरक्षा बलों की भारी तैनाती रही। विद्याधर नगर और आसपास के थानों के अलावा आरएसी, क्यूआरटी और दंगा निरोधक टीम को भी मौके पर तैनात किया गया था।
क्या हैं सवर्ण समाज की मुख्य मांगें?
सभा के दौरान राष्ट्रीय करणी सेना के नेताओं ने सरकार के सामने छह सूत्रीय मांगपत्र रखा। इनमें प्रमुख रूप से निम्नलिखित मुद्दे शामिल हैं:
- यूजीसी की नई गाइडलाइन को पूरी तरह वापस लिया जाए।
- आरक्षण व्यवस्था में व्यापक सुधार किया जाए।
- एससी-एसटी एक्ट में संशोधन की प्रक्रिया पर विचार हो।
- गोमाता को राष्ट्रीय पशु या राष्ट्रमाता का दर्जा दिया जाए।
- आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS) आरक्षण का सरलीकरण किया जाए।
- सवर्ण आयोग का गठन किया जाए।
संगठन के नेताओं ने आरोप लगाया कि पिछले आठ दिनों से महिला विंग की अध्यक्ष अनशन पर बैठी थीं, लेकिन सरकार की ओर से किसी प्रतिनिधि ने सुध तक नहीं ली। शिव सिंह शेखावत ने सरकार पर अनदेखी का आरोप लगाते हुए कहा कि पुलिस प्रशासन पर बल प्रयोग का दबाव था, हालांकि अधिकारियों ने उनकी मांगों को मुख्यमंत्री तक पहुंचाने का लिखित और मौखिक भरोसा दिया है।
राजनीतिक नाराजगी और आगे की रणनीति
सभा के दौरान नेताओं ने सत्ता पक्ष के जनप्रतिनिधियों, विशेषकर स्थानीय नेतृत्व के प्रति गहरी नाराजगी जताई। वक्ताओं ने कहा कि समाज के इतने बड़े आयोजनों में सरकार की ओर से संवाद स्थापित न करना उपेक्षा को दर्शाता है।
पुलिस अधिकारियों के आश्वासन के बाद फिलहाल हाइवे जाम करने का निर्णय टाल दिया गया है, लेकिन करणी सेना ने चेतावनी दी है कि यदि मांगें नहीं मानी गईं तो आने वाले समय में राजनीतिक मंचों पर इसका जवाब दिया जाएगा।
