देशभर में सुहागिनें अपने पति की लंबी उम्र के लिए करवा चौथ का व्रत रख रही हैं। लेकिन झुंझुनूं के ढीगाल गांव की वीरांगना मीना के लिए यह पर्व वीरगति को प्राप्त जीवनसाथी की यादों के बीच गुजरता है। मीना ने परिवार की महिलाओं के साथ पूजा-अर्चना कर अपने शहीद पति की स्मृति में व्रत रखा है।
पूजा की थाली सजेगी और दीपक भी जलेंगे, लेकिन मीना के सामने पति के साक्षात दर्शन की बजाय उनकी तस्वीर होगी। 25 जून 1992 को जन्मे अजय सिंह चौधरी साल 2010 में सेना में भर्ती हुए थे। सिग्नल कोर में रेडियो ऑपरेटर के तौर पर सेवाएं देते हुए उन्होंने मातृभूमि के लिए सर्वोच्च बलिदान दिया। उनके इस साहस और शौर्य के लिए उन्हें मरणोपरांत सेना पदक से सम्मानित किया गया था।
यादों के सहारे कट रहा जीवन
शहादत ने अजय सिंह को इतिहास में अमर कर दिया है, लेकिन परिवार में एक ऐसी शून्यता छोड़ दी है जिसे शब्दों में बयान नहीं किया जा सकता। करवा चौथ के दिन मीना की आंखें उसी चेहरे को तलाशती हैं, जिसे कभी सामने देखकर उन्होंने व्रत खोला था। तस्वीर भले ही खामोश रहती है, लेकिन उसमें कैद यादें हर साल इस पर्व पर जीवंत हो उठती हैं।
