मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने कहा कि आपातकाल के समय लोकतंत्र सेनानियों का संघर्ष लोकतंत्र रक्षा की ऐतिहासिक गाथा है। उनका त्याग और समर्पण युवा पीढ़ी के लिए प्रेरणा का स्रोत है। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र सेनानी अपने अनुभव से समाज को लोकतांत्रिक मूल्यों के प्रति समर्पित भाव से कार्य करने के लिए प्रेरित करें। 
    
मुख्यमंत्री बुधवार को मुख्यमंत्री निवास पर लोकतंत्र सेनानी सम्मान समारोह को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि अनेक पीढ़ियों के बलिदान के बाद देश को आजादी मिली। वहीं, आपातकाल के दौरान लोकतंत्र सेनानियों ने राष्ट्रहित के लिए कठिन परिस्थितियों का सामना कर लोकतंत्र की रक्षा की। इसलिए राष्ट्रवाद की विचारधारा उनकी तपस्या और संघर्ष से विशाल वटवृक्ष का रूप ले चुकी है।
    
उन्होंने कहा कि युवा पीढ़ी को यह पता होना चाहिए कि उसे जो लोकतांत्रिक व्यवस्था सहज रूप से मिली है उसके पीछे लोकतंत्र सेनानियों का त्याग छिपा है। जिससे वे लोकतंत्र के महत्व और संरक्षण की दिशा में काम कर सकें। उन्होंने कहा कि प्रत्येक लोकतंत्र सेनानी को अपने जीवन के अनुभवों को लिखित रूप में दर्ज करना चाहिए। वहीं, राज्य सरकार भी इनके योगदान को संरक्षित करेगी।
    
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में वर्ष 2014 के बाद देश तेजी से आगे बढ़ रहा है। हमारी अर्थव्यवस्था मजबूत बन रही है, गरीब कल्याण एवं विकास की योजनाओं का विस्तार हुआ है तथा वैश्विक मंच पर भारत का गौरव बढ़ा है। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र सेनानियों ने जिस राष्ट्र निर्माण का सपना देखा आज वह प्रधानमंत्री के मार्गदर्शन में पूरा हो रहा है। 
    
उन्होंने कहा कि लोकतंत्र सेनानी समाज में सकारात्मक वातावरण तैयार करने के लिए राष्ट्रहित जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर सभी वर्गों से निंरतर संवाद करें। जिससे सुशासन, विकास और सामाजिक संवेदना हम सभी की सर्वोच्च प्राथमिकता बने। उन्होंने कहा कि इससे राष्ट्र के लिए कठिन समय में व्यक्तिगत हितों से ऊपर उठकर योगदान देने की भावना भी मजबूत बनेगी। 
    
मुख्यमंत्री ने कहा कि लोकतंत्र सेनानियों की पीढ़ी ने आपातकाल को देखा और सहा, इसलिए वे समाज एवं राष्ट्र को दिशा देने की क्षमता रखते हैं। उनके अनुभव का लाभ प्रदेश को मिलना चाहिए। इस अवसर पर विधायक गोपाल शर्मा, पूर्व सांसद राजेन्द्र गहलोत सहित बड़ी संख्या में लोकतंत्र सेनानी उपस्थित रहे।