राजस्थान में बजरी खनन पर पूर्ण प्रतिबंध 31 अगस्त तक नदी क्षेत्रों में खनन पर लगी रोक

राजस्थान में नदी क्षेत्रों से बजरी खनन पर वार्षिक प्रतिबंध लागू हो गया है। राज्य सरकार ने पर्यावरण संरक्षण, नदियों के प्राकृतिक स्वरूप और जलीय जीव-जंतुओं की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए 1 जुलाई से 31 अगस्त तक नदी क्षेत्र में नए बजरी खनन पर पूरी तरह रोक लगा दी है। इस अवधि में केवल 30 जून तक तैयार किए गए और खनिज विभाग द्वारा सत्यापित स्टॉक यार्ड  से ही बजरी की बिक्री और परिवहन की अनुमति होगी।

खनिज विभाग के मुताबिक सभी लीजधारकों के लिए मानसून शुरू होने से पहले नदी से निकाली गई बजरी का स्टॉक तैयार करना अनिवार्य है। विभागीय अधिकारियों द्वारा स्टॉक का भौतिक सत्यापन, मापन, सीमांकन, फोटो-वीडियोग्राफी और जियो-टैगिंग के जरिए रिकॉर्ड तैयार किया जाता है। प्रतिबंध अवधि में केवल इसी प्रमाणित स्टॉक से बजरी की बिक्री की जाएगी। 

सरकार के मुताबिक  यदि कोई व्यक्ति नदी क्षेत्र में अवैध खनन करता है, सत्यापित स्टॉक से अधिक बजरी का परिवहन करता है या पुराने स्टॉक में नई बजरी मिलाकर भंडारण बढ़ाता है तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। ऐसे मामलों में वाहन जब्त करने, जुर्माना लगाने और कानूनी कार्रवाई का प्रावधान है। बिना वैध ई-रवन्ना के बजरी परिवहन को भी अवैध माना जाएगा।

मौसम विशेषज्ञों के अनुसार, मानसून के दौरान नदी तल से बजरी निकालने से जल प्रवाह प्रभावित होता है और नदी किनारों के कटाव, भू-जल स्तर में गिरावट तथा जलीय जीवों के आवास को नुकसान पहुंचने की आशंका रहती है। इसी वजह से हर साल बरसात के दौरान बजरी खनन पर रोक लगाई जाती है। इस बार खनिज विभाग ने अवैध खनन और परिवहन रोकने के लिए 24 घंटे निगरानी व्यवस्था लागू करने की बात कही है। 1 जुलाई से 31 अगस्त तक नदी क्षेत्रों में बजरी खनन पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगा और नियमों का उल्लंघन करने वालों पर सख्त कार्रवाई होगी।