निवाड़ी जिले के नेगुआ स्थित शास्त्री उच्चतर माध्यमिक विद्यालय के शिक्षक और कर्मचारी पिछले 20 महीने से नियमित वेतन न मिलने के कारण गंभीर आर्थिक संकट से जूझ रहे हैं। दीपावली के पर्व पर भी वेतन की आस लगाए बैठे स्कूल स्टाफ को मानदेय पर गुजारा करना पड़ रहा है। मामले में मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के आदेशों की अवहेलना के आरोप सामने आए हैं।
हाईकोर्ट के आदेश और प्रशासनिक अमले की भूमिका
याचिका क्रमांक WP 39628/2024 के दस्तावेजों के मुताबिक, अध्यापक संवर्ग के वेतन भुगतान को लेकर उच्च न्यायालय जबलपुर ने स्पष्ट निर्देश दिए थे। इसके बावजूद शिक्षकों को नियमित वेतन देने के बजाय केवल मानदेय दिया जा रहा है। स्कूल के प्राचार्य राजू पाठक ने जिला शिक्षा अधिकारी उन्मेष श्रीवास्तव और जिला पंचायत सीईओ रोहन सक्सेना पर मनमाने तरीके से वेतन रोकने का आरोप लगाया है।
प्राचार्य राजू पाठक ने बताया कि कर्मचारियों का संविलियन अक्टूबर 2018 से अध्यापक संवर्ग के वेतनमान में हुआ था। शासन के 12 जून 2017 के आदेश के अनुसार सभी को नियमित भुगतान किया जा रहा था, लेकिन संबंधित अधिकारियों ने बिना किसी लिखित आदेश के इसे रोक दिया। इस मामले में जब हाईकोर्ट में सुनवाई हुई, तो अधिकारी वेतन रोकने का कोई ठोस दस्तावेज पेश नहीं कर पाए, जिसके बाद अवमानना से जुड़ी कार्रवाई भी शुरू की गई है।
दीपावली के मुहाने पर आर्थिक तंगी और शिक्षकों की मांग
शिक्षकों का कहना है कि वे पूरी निष्ठा के साथ शिक्षण कार्य में जुटे हैं, लेकिन पिछले डेढ़ साल से अधिक समय से वेतन के नाम पर केवल मानदेय मिलने से परिवार का भरण-पोषण मुश्किल हो गया है। त्योहार के समय भी खाली हाथ बैठे स्टाफ ने प्रशासन से उच्च न्यायालय के आदेशों का अविलंब पालन करने की मांग की है।
प्राचार्य और स्कूल स्टाफ ने मांग उठाई है कि वेतन भुगतान में आ रही बाधाओं को तुरंत दूर किया जाए और पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई की जाए। अब प्रशासनिक स्तर पर इन न्यायालयीन निर्देशों के अनुपालन और जवाबदेही तय होने पर सभी की नजरें टिकी हैं।
