सुप्रीम कोर्ट ने सड़क सुरक्षा और थर्ड-पार्टी बीमा अनुपालन को लेकर बड़ा निर्देश देते हुए केंद्र सरकार से ऐसा पायलट प्रोजेक्ट तैयार करने को कहा है, जिसके तहत थर्ड-पार्टी इंश्योरेंस नहीं होने पर वाहनों को पेट्रोल और डीजल नहीं दिया जाएगा। अदालत ने कहा कि बिना वैध बीमा के सड़क पर चलने वाले वाहनों की संख्या कम करने के लिए प्रभावी व्यवस्था बनाई जानी चाहिए। इसके साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने नई गाड़ियों के लिए अनिवार्य थर्ड-पार्टी बीमा की अवधि बढ़ाने का भी निर्देश दिया है। प्रस्तावित व्यवस्था के अनुसार नई कारों के लिए 4 वर्ष और दोपहिया वाहनों के लिए 6 वर्ष का थर्ड-पार्टी बीमा अनिवार्य होगा, ताकि दुर्घटना की स्थिति में पीड़ितों को समय पर मुआवजा मिल सके और बीमा कवरेज लगातार बना रहे। दूसरी ओर, भारतीय रिजर्व बैंक ने अपनी मौद्रिक नीति समीक्षा में रेपो रेट 5.25% पर यथावत रखने का फैसला किया है। इसका सीधा असर यह होगा कि फिलहाल होम लोन, ऑटो लोन और पर्सनल लोन की EMI में कोई राहत नहीं मिलेगी और नए व मौजूदा कर्ज की ब्याज दरों में भी तत्काल कमी की संभावना नहीं है। सुप्रीम कोर्ट और आरबीआई के इन दोनों फैसलों का असर देशभर के करोड़ों वाहन मालिकों और लोन लेने वाले उपभोक्ताओं पर पड़ने वाला है।
बीमा नहीं तो नहीं मिलेगा पेट्रोल-डीजल! सुप्रीम कोर्ट का बड़ा निर्देश
संक्षेप में
सुप्रीम कोर्ट ने सड़क सुरक्षा और थर्ड-पार्टी बीमा अनुपालन को लेकर बड़ा निर्देश देते हुए केंद्र सरकार से ऐसा पायलट प्रोजेक्ट तैयार करने को कहा है, जिसके तहत थर्ड-पार्टी इंश्योरेंस नहीं होने पर वाहनों को पेट्रोल और डीजल नहीं दिया जाएगा। अदालत ने कहा कि बिना वैध बीमा के सड़क पर चलने वाले वाहनों की संख्या कम करने के लिए प्रभावी व्यवस्था बनाई जानी चाहिए।
मुख्य बातें
- सुप्रीम कोर्ट ने बिना थर्ड-पार्टी इंश्योरेंस वाले वाहनों को पेट्रोल-डीजल नहीं देने के लिए पायलट प्रोजेक्ट तैयार करने का निर्देश दिया है।
- नई कारों के लिए 4 साल और नई बाइक के लिए 6 साल का थर्ड-पार्टी बीमा अनिवार्य करने का निर्देश दिया गया है।
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अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
. नई कार और बाइक के लिए कितने समय का थर्ड-पार्टी बीमा अनिवार्य होगा?
नई कारों के लिए 4 साल और नई बाइक के लिए 6 साल।
RBI ने रेपो रेट कितने प्रतिशत पर बरकरार रखा है?
5.25% पर