राजस्थान में सरकारी स्कूलों में बाहरी लोगों के प्रवेश को लेकर भजनलाल सरकार ने सख्ती बढ़ा दी है। शिक्षा विभाग ने संस्था प्रधान की पूर्व लिखित अनुमति के बिना किसी बाहरी व्यक्ति के स्कूल परिसर में प्रवेश, फोटो-वीडियोग्राफी, साक्षात्कार और लाइव स्ट्रीमिंग पर रोक लगाई है। इसका कारण विद्यार्थियों की सुरक्षा, निजता और गरिमा बनाए रखना तथा स्कूलों की शैक्षणिक गतिविधियों में अनधिकृत हस्तक्षेप रोकना बताया गया है। नए आदेश के बाद अब स्कूलों में आने वाले प्रत्येक व्यक्ति को विजिटर रजिस्टर में जानकारी दर्ज करनी होगी और बिना अधिकृत शिक्षक या अधिकारी के कक्षा, प्रयोगशाला, पुस्तकालय, छात्रावास या खेल मैदान जैसे क्षेत्रों में प्रवेश नहीं मिलेगा। आदेश के अनुसार विद्यार्थियों के फोटो, वीडियो या व्यक्तिगत जानकारी को उनकी सुरक्षा और निजता प्रभावित करने वाले तरीके से प्रकाशित या प्रसारित नहीं किया जा सकेगा। वहीं, बिना अनुमति प्रवेश करने, परिसर छोड़ने से इनकार करने या स्कूल की गतिविधियों में बाधा डालने पर प्रधानाचार्य पुलिस और शिक्षा अधिकारियों को सूचना देकर कार्रवाई करा सकेंगे। हालांकि, कांग्रेस ने इस आदेश को लेकर सरकार पर निशाना साधा है। नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने इसे ‘तानाशाही आदेश’ बताते हुए वापस नहीं लेने पर सविनय अवज्ञा आंदोलन की चेतावनी दी है, जबकि गोविंद सिंह डोटासरा ने आरोप लगाया कि सरकार सरकारी स्कूलों की बदहाली और अपनी नाकामियों को छिपाने के लिए पारदर्शिता पर रोक लगा रही है।

5 बड़े कारण और आदेश के अहम बिंदु—

1. बाहरी लोगों के प्रवेश पर रोक: संस्था प्रधान की पूर्व अनुमति के बिना कोई बाहरी व्यक्ति सरकारी स्कूल परिसर में प्रवेश नहीं कर सकेगा, ताकि स्कूल का शैक्षणिक और अनुशासित वातावरण प्रभावित न हो।

2. फोटो-वीडियो बनाने पर सख्ती: विद्यार्थियों, शिक्षकों और स्कूल गतिविधियों की फोटोग्राफी, वीडियोग्राफी, ऑडियो रिकॉर्डिंग या लाइव स्ट्रीमिंग के लिए प्रधानाचार्य की पूर्व लिखित अनुमति जरूरी होगी, ताकि बच्चों की तस्वीरों और वीडियो का गलत इस्तेमाल रोका जा सके।

3. बच्चों की निजता और सुरक्षा: विद्यार्थियों की व्यक्तिगत जानकारी, पहचान, फोटो या वीडियो को उनकी गरिमा और सुरक्षा प्रभावित करने वाले तरीके से प्रकाशित या प्रसारित नहीं किया जा सकेगा।

4. स्कूल के संवेदनशील क्षेत्रों में प्रवेश सीमित: बाहरी व्यक्ति प्रधानाचार्य, शिक्षक या अधिकृत अधिकारी के साथ ही कक्षा-कक्ष, प्रयोगशाला, पुस्तकालय, छात्रावास और खेल मैदान जैसे क्षेत्रों में जा सकेगा, ताकि विद्यार्थियों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।

5. नियम तोड़ने पर कार्रवाई: बिना अनुमति प्रवेश करने, परिसर छोड़ने से इनकार करने या स्कूल के काम में बाधा डालने वाले व्यक्ति की सूचना पुलिस और जिला शिक्षा अधिकारी को दी जा सकेगी। सरकार का तर्क है कि इससे स्कूलों में अनुशासन और सुरक्षा मजबूत होगी, जबकि कांग्रेस का आरोप है कि इससे सरकारी स्कूलों की वास्तविक स्थिति की निगरानी और पारदर्शिता प्रभावित होगी।