Thursday, 24 September 2026
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श्री पद्मनाभस्वामी मंदिर में दिखा खगोलीय चमत्कार: डूबता सूरज गुज़रा गोपुरम की पांचों खिड़कियों से, आनंद महिंद्रा ने शेयर किया वीडियो

संक्षेप में

केरल के श्री पद्मनाभस्वामी मंदिर में 23 सितंबर को शरद विषुव के मौके पर सूर्य की किरणें मंदिर के गोपुरम की पांचों खिड़कियों से एक-एक कर गुजरीं। प्राचीन वास्तुकला के इस अनूठे उदाहरण का वीडियो उद्योगपति आनंद महिंद्रा ने शेयर किया है।

मुख्य बातें

  • घटना 23 सितंबर 2026 को शरद विषुव के दिन दर्ज की गई।
  • डूबता हुआ सूरज मंदिर की गोपुरम की सभी 5 खिड़कियों से होकर गुजरा।
  • उद्योगपति आनंद महिंद्रा ने इसका वीडियो सोशल मीडिया पर शेयर किया।
  • यह मंदिर केरल के तिरुवनंतपुरम में स्थित है।
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श्री पद्मनाभस्वामी मंदिर में दिखा खगोलीय चमत्कार: डूबता सूरज गुज़रा गोपुरम की पांचों खिड़कियों से, आनंद महिंद्रा ने शेयर किया वीडियो

केरल के तिरुवनंतपुरम स्थित प्रसिद्ध श्री पद्मनाभस्वामी मंदिर में 23 सितंबर को एक दुर्लभ खगोलीय नजारा देखने को मिला. शरद विषुव (Autumnal Equinox) के दिन अस्त होता हुआ सूरज मंदिर के गोपुरम (मीनार) की सभी पांच खिड़कियों से एक-एक करके गुजरा. सदियों पुरानी वास्तुकला और प्राचीन खगोल विज्ञान के इस अद्भुत समन्वय का वीडियो उद्योगपति आनंद महिंद्रा ने सोशल मीडिया पर शेयर किया है, जिसके बाद से यह फुटेज इंटरनेट पर तेजी से वायरल हो रहा है.

विषुव (Equinox) साल का वह समय होता है जब सूर्य की किरणें भूमध्य रेखा (Equator) पर ठीक लंबवत (vertical) पड़ती हैं. इस खगोलीय स्थिति के कारण पूरी पृथ्वी पर दिन और रात की अवधि लगभग बराबर होती है. साल में ऐसी खगोलीय घटना दो बार घटित होती है. पहला विषुव 21 मार्च के आसपास होता है, जो उत्तरी गोलार्ध में वसंत ऋतु की शुरुआत का प्रतीक बनता है. वहीं, दूसरा विषुव 23 सितंबर के आसपास होता है, जो शरद ऋतु के आगमन का संकेत देता है.

सदियों पुरानी इंजीनियरिंग और मंदिर की बनावट

श्री पद्मनाभस्वामी मंदिर की इस मीनार का निर्माण प्राचीन काल में इसी खगोलीय गति को ध्यान में रखकर किया गया था. मंदिर के गोपुरम की खिड़कियों की सीध इस तरह से डिजाइन की गई है कि साल में केवल विषुव के दिन ही अस्त होता हुआ सूर्य इन सभी openings से होकर गुजरता है. साल के बाकी दिनों में सूर्यास्त या तो टावर के उत्तर में होता है या फिर दक्षिण दिशा में, जिससे यह विशिष्ट दृश्यावली केवल इन दो विशेष तिथियों पर ही संभव हो पाती है.

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, यह खगोलीय प्रक्रिया बेहद क्रमबद्ध तरीके से पूरी होती है. सबसे पहले डूबता हुआ सूरज मंदिर की सबसे ऊपरी खिड़की में नजर आता है और उसके बाद धीरे-धीरे नीचे की ओर बनी खिड़कियों से होकर आगे बढ़ता है. जब सूर्य की किरणें तीसरी खिड़की में प्रवेश करती हैं, तो मंदिर की वास्तुकला का यह नजारा और अधिक स्पष्ट हो जाता है. इसके बाद सूरज बाकी बची हुई दो खिड़कियों से गुजरते हुए क्षितिज में ओझल हो जाता है.

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

श्री पद्मनाभस्वामी मंदिर में यह खगोलीय घटना कब दिखाई देती है?

यह दुर्लभ खगोलीय घटना साल में दो बार, विषुव (Equinox) के दिन, 21 मार्च और 23 सितंबर के आसपास दिखाई देती है, जब सूरज मंदिर की गोपुरम खिड़कियों से होकर गुजरता है।

विषुव (Equinox) क्या होता है?

विषुव साल का वह समय है जब सूर्य की किरणें भूमध्य रेखा पर ठीक लंबवत पड़ती हैं, जिसके परिणामस्वरूप पूरी पृथ्वी पर दिन और रात की अवधि लगभग बराबर होती है।

श्री पद्मनाभस्वामी मंदिर कहां स्थित है?

श्री पद्मनाभस्वामी मंदिर केरल के तिरुवनंतपुरम में स्थित है, जो अपनी प्राचीन वास्तुकला और ऐतिहासिक भव्यता के लिए विश्व प्रसिद्ध है।

इस घटना का वीडियो किसने शेयर किया है?

उद्योगपति आनंद महिंद्रा ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर मंदिर का यह वायरल वीडियो शेयर किया है।