महाराष्ट्र विधानसभा में समान नागरिक संहिता (UCC) विधेयक पर चर्चा के दौरान एनसीपी (अजित पवार गुट) की विधायक सना मलिक और गृह राज्य मंत्री योगेश कदम के बीच तीखी बहस देखने को मिली। सदन में पाकिस्तान का जिक्र होने पर सना मलिक ने कड़ी आपत्ति जताई, जिसके जवाब में मंत्री योगेश कदम ने स्पष्ट किया कि कानून किसी धर्मग्रंथ के आधार पर नहीं, बल्कि समाज को न्याय दिलाने के लिए बनाए जाते हैं।

सना मलिक की आपत्ति और पाकिस्तान का मुद्दा विधेयक पर चर्चा के दौरान सना मलिक ने सदन में दो मुख्य मुद्दे उठाए। उन्होंने कहा कि UCC जैसे संवेदनशील विषयों पर चर्चा करते समय बार-बार पाकिस्तान का उदाहरण देना उचित नहीं है। मलिक ने तर्क दिया कि चर्चा का केंद्र केवल महिलाओं के खिलाफ होने वाले अत्याचार और उनके अधिकारों तक सीमित रहना चाहिए। उन्होंने जोर देकर कहा कि महिलाओं से जुड़े मुद्दों को किसी विशेष धर्म या समुदाय से जोड़ना गलत है। सना मलिक ने संविधान का हवाला देते हुए कहा कि प्रत्येक नागरिक को अपने धर्म का पालन करने और उसे मानने का पूर्ण अधिकार प्राप्त है।

योगेश कदम का जवाब सना मलिक की टिप्पणी के बाद गृह राज्य मंत्री योगेश कदम ने मोर्चा संभालते हुए कहा कि कानून निर्माण की प्रक्रिया में धर्मग्रंथों की कोई भूमिका नहीं होती। उन्होंने कहा- "सना मलिक को मैं बताना चाहता हूं कि कोई भी कानून तैयार होते वक्त किसी धर्मग्रंथ के आधार पर फैसला नहीं लिया जाता। यह विधिमंडल समाज के हर घटक को न्याय दिलाने के लिए है, न कि किसी धार्मिक आधार पर निर्णय लेने के लिए।"

मंत्री ने आगे कहा कि केंद्र और राज्य सरकारों द्वारा अब तक बनाए गए सभी कानून सभी समुदायों के हितों को ध्यान में रखकर तैयार किए गए हैं, न कि किसी एक धर्म को लक्षित करके।

कानून और सामाजिक न्याय योगेश कदम ने स्पष्ट किया कि कानून का प्राथमिक उद्देश्य समाज में हो रहे अन्याय को रोकना है। उन्होंने किसी भी मुद्दे को धर्म से जोड़ने की प्रवृत्ति को खारिज करते हुए कहा कि चर्चा के दौरान इस तरह के संदर्भों से बचना चाहिए और सदन की गरिमा के अनुरूप केवल विधेयक के मूल उद्देश्यों पर केंद्रित रहना चाहिए।