बुरहानपुर जिले में 'स्वामित्व अधिकार अभिलेख निष्पादन एवं पंजीयन 2026' योजना के तहत प्रशासनिक कार्य सौंपे जाने को लेकर ग्राम सचिवों ने विरोध का बिगुल फूंक दिया है। प्रदेश स्तर पर पटवारी संगठन द्वारा यह काम ग्राम सचिवों को दिए जाने की मांग के बाद से पंचायत कर्मियों में नाराजगी है। इसी सिलसिले में ग्राम सचिव संगठन ने जनपद पंचायत सीईओ संजय सिंह को ज्ञापन सौंपकर इस अतिरिक्त जिम्मेदारी से खुद को पूरी तरह अलग रखने की मांग की है।

सचिवों का कहना है कि राजस्व विभाग और पटवारी व्यवस्था से जुड़े इस कार्य से उनके मूल पंचायत कार्य प्रभावित होंगे, जिसके चलते वे इसे संभालने में असमर्थ हैं।

मूल दायित्वों पर असर का हवाला

ग्राम सचिव संगठन ने जनपद पंचायत कार्यालय में सौंपे गए ज्ञापन में साफ किया है कि स्वामित्व अधिकार अभिलेख से जुड़ा काम पूरी तरह राजस्व विभाग के दायरे में आता है। पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के तहत अपने निर्धारित कार्यों का निर्वहन कर रहे सचिवों का तर्क है कि इस अतिरिक्त काम का बोझ डालने से उनके नियमित कामकाज पर सीधा असर पड़ेगा।

संगठन के प्रतिनिधियों के मुताबिक, पटवारी संगठन की ओर से इस योजना से जुड़े अभिलेख तैयार करने और पंजीयन का पूरा जिम्मा ग्राम सचिवों को सौंपे जाने की मांग की गई थी, जिसका वे शुरुआती दौर से ही विरोध कर रहे हैं।

पटवारियों को सहयोग, पर पूरा जिम्मा नहीं

ग्राम सचिवों ने स्पष्ट किया है कि वे राजस्व विभाग के मैदानी कर्मचारियों यानी पटवारियों के कार्यों में आवश्यक सहयोग देने के लिए तैयार हैं, लेकिन इस पूरी प्रक्रिया का जिम्मा अकेले उनके कंधों पर डालना स्वीकार नहीं किया जाएगा।

प्रमोद महाजन, ग्राम पंचायत जिला सचिव संघ, बुरहानपुर ने कहा- "स्वामित्व अधिकार अभिलेख का कार्य हमारा मूल दायित्व नहीं है और इसे हम पर थोपा जा रहा है, जिससे हमारे नियमित प्रशासनिक कार्य बाधित होंगे।"

संगठन ने शासन स्तर से इस मामले में हस्तक्षेप करने और स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी करने की मांग की है, ताकि यह तय हो सके कि किस विभाग और अधिकारी की इस योजना के क्रियान्वयन में क्या भूमिका होगी।

वरिष्ठ कार्यालय को भेजा जाएगा ज्ञापन

ग्राम सचिवों की इस आपत्ति और ज्ञापन पर प्रतिक्रिया देते हुए जनपद पंचायत सीईओ संजय सिंह ने कहा- "सचिवों की ओर से स्वामित्व अधिकार अभिलेख योजना के संबंध में ज्ञापन सौंपा गया है, जिसे अब शासन स्तर पर वरिष्ठ अधिकारियों के पास मार्गदर्शन और निर्णय के लिए भेजा जा रहा है।"

प्रशासनिक स्तर पर इस मांग के पहुंचने के बाद अब शासन के अगले रुख पर सभी की निगाहें टिकी हैं कि क्या इस कार्य के लिए राजस्व अमले को ही जिम्मेदार रखा जाएगा या पंचायत कर्मियों को कोई नई भूमिका दी जाएगी।