नई दिल्ली: तृणमूल कांग्रेस (TMC) के भीतर चल रहे राजनीतिक संकट के बीच पार्टी प्रमुख ममता बनर्जी को एक और बड़ा झटका लगा है। पार्टी की वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सांसद सुष्मिता देव ने टीएमसी की प्राथमिक सदस्यता और राज्यसभा सदस्यता दोनों से इस्तीफा दे दिया है। बताया जा रहा है कि उन्होंने बुधवार सुबह पार्टी नेतृत्व को अपना इस्तीफा भेज दिया।
सुष्मिता देव का यह कदम ऐसे समय पर आया है जब टीएमसी पहले से ही अंदरूनी असंतोष और बगावती सुरों का सामना कर रही है। हालांकि पार्टी की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है, लेकिन सूत्रों का कहना है कि यह उनका व्यक्तिगत फैसला है।
हिमंत बिस्वा सरमा से मुलाकात ने बढ़ाई अटकलें
इस्तीफे के कुछ ही घंटों बाद सुष्मिता देव ने असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा से मुलाकात की। इस मुलाकात ने राजनीतिक गलियारों में नई चर्चाओं को जन्म दे दिया है। माना जा रहा है कि सुष्मिता देव जल्द ही भारतीय जनता पार्टी (BJP) का दामन थाम सकती हैं।
हालांकि अभी तक न तो सुष्मिता देव और न ही बीजेपी की ओर से इस संबंध में कोई औपचारिक घोषणा की गई है, लेकिन राजनीतिक विश्लेषक इस मुलाकात को महत्वपूर्ण मान रहे हैं।
कांग्रेस से टीएमसी तक का राजनीतिक सफर
सुष्मिता देव ने अपने राजनीतिक करियर की शुरुआत कांग्रेस से की थी। वर्ष 2014 के लोकसभा चुनाव में उन्होंने असम के सिलचर संसदीय क्षेत्र से कांग्रेस उम्मीदवार के रूप में जीत दर्ज की थी। इसके बाद अगस्त 2021 में उन्होंने कांग्रेस छोड़कर तृणमूल कांग्रेस का दामन थाम लिया था।
टीएमसी में शामिल होने के बाद वह पार्टी की राष्ट्रीय प्रवक्ता और महिला संगठन की प्रमुख नेताओं में शामिल रहीं। उन्हें दो बार राज्यसभा भेजा गया और पार्टी नेतृत्व के करीबी चेहरों में गिना जाता रहा।
टीएमसी में बढ़ रही असंतुष्टि
पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में पार्टी के प्रदर्शन को लेकर पहले से ही टीएमसी के भीतर असंतोष की खबरें सामने आती रही हैं। कई नेताओं और विधायकों द्वारा पार्टी नेतृत्व की कार्यशैली पर सवाल उठाए गए हैं।
राजनीतिक सूत्रों के अनुसार, पार्टी के कुछ सांसद और विधायक नेतृत्व से नाराज बताए जा रहे हैं। ऐसे में सुष्मिता देव का इस्तीफा टीएमसी के लिए एक और चुनौती के रूप में देखा जा रहा है।
कांग्रेस-टीएमसी रिश्तों पर भी चर्चा
इस घटनाक्रम के बीच कांग्रेस और टीएमसी के संभावित राजनीतिक समीकरणों को लेकर भी चर्चाएं तेज हैं। हाल के दिनों में ममता बनर्जी और कांग्रेस नेतृत्व के बीच हुई मुलाकातों के बाद विपक्षी राजनीति में नए समीकरण बनने की अटकलें लगाई जा रही हैं।
हालांकि दोनों दलों की ओर से किसी भी तरह के विलय या औपचारिक राजनीतिक समझौते को लेकर कोई पुष्टि नहीं की गई है, लेकिन राजनीतिक हलकों में इस विषय पर चर्चाएं जारी हैं।
