वंदे भारत उद्घाटन में फर्जी बिलों का आरोप, RTI में 15 लाख के भुगतान पर उठे गंभीर सवाल

जोधपुर रेल मंडल में 22 मई को 20 कोच वाली वंदे भारत एक्सप्रेस के उद्घाटन कार्यक्रम से जुड़ा कथित वित्तीय अनियमितता का मामला सामने आया है। सूचना के अधिकार (RTI) के तहत प्राप्त दस्तावेजों के आधार पर RTI कार्यकर्ता दीनदयाल बंग ने आरोप लगाया है कि कार्यक्रम की तैयारियों के नाम पर सरकारी धन के दुरुपयोग और फर्जी दस्तावेज तैयार कर भुगतान करने का संगठित खेल हुआ। आरोप है कि रेलवे के सहायक मंडल अभियंता कार्यालय में बिना किसी वित्तीय स्वीकृति, बिना वर्क ऑर्डर और बिना किसी भौतिक माप-जोख के करीब 15 लाख रुपये के कार्य सीधे चहेते वेंडर्स को आवंटित कर दिए गए। बाद में ऑडिट प्रक्रिया से बचने के लिए कथित तौर पर बंद कमरों में बैठकर प्रतिस्पर्धी कोटेशन तैयार किए गए, ताकि भुगतान को नियमों के अनुरूप दिखाया जा सके।

RTI से सामने आए दस्तावेजों के मुताबिक  टेंट व्यवस्था के लिए महिंद्रा टेंट फैक्ट्री को 12.05 लाख रुपये का भुगतान किया गया। वहीं औपचारिक प्रक्रिया पूरी दिखाने के लिए कार्तिक टेंट और के.एम. टेंट के नाम से भी कोटेशन फाइल में लगाए गए। सबसे बड़ा सवाल यह है कि तीनों अलग-अलग फर्मों के कोटेशन में CGST और SGST की राशि 80,997 रुपये बिल्कुल समान दर्ज है, जबकि तीनों के कुल बिल अलग-अलग बताए गए हैं। विशेषज्ञों के अनुसार अलग-अलग ग्रॉस अमाउंट पर टैक्स की राशि एक जैसी होना गणितीय रूप से संभव नहीं है, जिससे दस्तावेजों के कथित रूप से कॉपी-पेस्ट कर तैयार किए जाने की आशंका और मजबूत होती है। फिलहाल ये सभी आरोप RTI के माध्यम से प्राप्त दस्तावेजों के आधार पर लगाए गए हैं। मामले में रेलवे प्रशासन की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया या स्पष्टीकरण सामने नहीं आया है।