छिंदवाड़ा नगर पालिक निगम में सरकारी वाहनों के रख-रखाव और संचालन की कार्यप्रणाली एक बार फिर सवालों के घेरे में है। परासिया रोड स्थित सांसद विवेक बंटी साहू के कार्यालय के सामने बने कचरा घर में डंपिंग के दौरान निगम की एक जेसीबी ने नए डंपर को जोरदार टक्कर मार दी, जिससे वाहन बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया।
यह डंपर शहर की सफाई व्यवस्था को मजबूत करने के लिए कुछ ही दिन पहले निगम बेड़े में शामिल किया गया था। वाहन मिलने के कुछ ही दिनों के भीतर इस तरह की घटना होना निगम के अमले की कार्यशैली पर बड़े सवाल खड़े करता है।
मौके पर मरम्मत और प्रशासनिक खामोशी
हादसे के बाद जो बात सबसे ज्यादा चर्चा में है, वह है घटना के तुरंत बाद बरती गई संदिग्ध गोपनीयता। नियमों के मुताबिक किसी भी सरकारी संपत्ति के नुकसान की सूचना तत्काल वरिष्ठ अधिकारियों को दी जानी चाहिए और उसका तकनीकी आकलन कराया जाना अनिवार्य है।
लेकिन इस मामले में आरोप है कि किसी उच्च अधिकारी को सूचना देने या पंचनामा बनाने के बजाय, जेसीबी चालक ने मौके पर ही डंपर को सुधारने का प्रयास शुरू कर दिया। इस बात का कोई स्पष्ट जवाब नहीं है कि बिना किसी तकनीकी मुआयने के वाहन को मौके पर ही ठीक करने का निर्देश किसने दिया था।
वाहन के बीमा से लेकर लाइसेंस तक कई अनसुलझे सवाल
जनता के टैक्स के पैसों से खरीदे गए इन वाहनों की सुरक्षा को लेकर कई गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। स्थानीय स्तर पर यह जांच की मांग उठ रही है कि क्या दुर्घटनाग्रस्त डंपर का बीमा था या नहीं और यदि था तो क्लेम की क्या प्रक्रिया अपनाई गई।
इसके साथ ही भारी वाहनों के संचालन में लगे चालकों की योग्यता पर भी सवाल उठ रहे हैं। यह स्पष्ट नहीं है कि जेसीबी और अन्य भारी वाहन चलाने वाले कर्मचारियों के पास वैध लाइसेंस और जरूरी तकनीकी प्रशिक्षण था या नहीं।
निष्पक्ष जांच की मांग तेज
निगम की इस लापरवाही को लेकर स्थानीय स्तर पर आक्रोश है। मांग की जा रही है कि पूरे घटनाक्रम की विभागीय जांच हो ताकि यह साफ हो सके कि नुकसान का वास्तविक आंकड़ा क्या है और इसकी भरपाई किसकी जिम्मेदारी से होगी। फिलहाल निगम प्रबंधन की ओर से इस पूरे मामले में कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है।
