इंटरनेशनल डीजल एजेंसी की ऑयल मार्केट रिपोर्ट में वैश्विक स्तर पर ईंधन संकट को लेकर बड़ा खुलासा हुआ है. रिपोर्ट के मुताबिक, साल 2027 तक डीजल की किल्लत बनी रह सकती है क्योंकि जिस समय स्टॉक में बढ़ोतरी होनी चाहिए, उस अवधि में भी स्टोरेज टैंक खाली हो रहे हैं. मांग के मुकाबले आपूर्ति में आ रही इन बाधाओं की वजह से वैश्विक बाजार में संतुलन बिगड़ गया है.
पेरिस स्थित इस एजेंसी ने बताया कि साल के अंत तक रिफाइनरियां उत्पादन बढ़ा भी लें, तब भी सप्लाई में किसी बड़े सुधार की गुंजाइश बेहद कम है. मिडिल ईस्ट से रिफाइंड उत्पादों के एक्सपोर्ट में तेजी नहीं आने पर मार्केट में डिमांड-सप्लाई का यह गैप और बढ़ सकता है.
रिकॉर्ड स्तर पर पहुंची थोक और खुदरा कीमतें
पिछले महीने अमेरिका और यूरोप के बाजारों में डीजल की थोक कीमतें 220 डॉलर प्रति बैरल के रिकॉर्ड स्तर को छू गईं. इसी तरह सिंगापुर में भी थोक भाव 200 डॉलर के आंकड़े को पार कर गए. कीमतों में हालिया नरमी के बावजूद मौजूदा दाम अमेरिका-ईरान संघर्ष शुरू होने से पहले के स्तर से लगभग दोगुने बने हुए हैं.
अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (IEA) के आंकड़ों के मुताबिक, सितंबर में अमेरिकी खुदरा बाजार में डीजल पहली बार 6 डॉलर प्रति गैलन के पार बिकता नजर आया. ईरान में तनातनी बढ़ने के बाद से वहां खुदरा डीजल के दामों में करीब 70 फीसदी का उछाल दर्ज किया गया है.
खाड़ी देशों में संघर्ष और सप्लाई चेन में रुकावट
पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक तनाव और होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) से होने वाली आपूर्ति में बाधाओं ने स्थिति को गंभीर बना दिया है. सऊदी अरब के साथ-साथ कुवैत, संयुक्त अरब अमीरात और अन्य खाड़ी देशों में रिफाइनरियों तथा तेल टैंकरों को निशाना बनाए जाने से वैश्विक डीजल आवक पर सीधा असर पड़ा है.
सामान्य तौर पर अगस्त से सितंबर के शुरुआती हफ्तों में दुनियाभर का डीजल स्टॉक तेजी से भरता है, लेकिन इस बार ट्रेंड इसके उलट रहा है. स्थिति को नियंत्रित करने के लिए अमेरिका और कई यूरोपीय देश अपने स्ट्रैटेजिक रिजर्व से तेल बाजार में झोंक रहे हैं, जिससे उनके अपने भंडार भी तेजी से कम हो रहे हैं.
