2027 में बढ़ सकती है महंगाई, खाने-पीने की चीजों के दाम पर बढ़ेगा दबाव: अलनीनो और महंगे तेल से बढ़ी चिंता
मजबूत अलनीनो, महंगे ईंधन और खाद की बढ़ती लागत से 2027 में वैश्विक खाद्य महंगाई बढ़ने का जोखिम जताया गया है, जिसका असर भारत पर भी पड़ सकता है।
2027 में दुनिया के कई देशों में खाने-पीने की चीजों की कीमतों पर दबाव बढ़ सकता है। जेपी मॉर्गन की एक रिपोर्ट में मजबूत अलनीनो और बढ़ी हुई ऊर्जा कीमतों को वैश्विक महंगाई के लिए बड़ा जोखिम बताया गया है। रिपोर्ट के मुताबिक, भारत जैसे कृषि पर निर्भर उभरते बाजारों पर इसका असर अपेक्षाकृत ज्यादा पड़ सकता है।
कमजोर मानसून से खेती पर असर
अलनीनो के मजबूत होने से दक्षिण और दक्षिण-पूर्व एशिया में बारिश और तापमान का पैटर्न प्रभावित हो सकता है। भारत में इसका असर कृषि उत्पादन पर पड़ने की आशंका है। हालिया रिपोर्टों के मुताबिक 2026-27 में मजबूत अलनीनो की संभावना बढ़ रही है और इससे कई कृषि जिंसों की कीमतों में उतार-चढ़ाव का जोखिम है।
जेपी मॉर्गन के अनुसार, मजबूत अलनीनो अकेले वैश्विक खाद्य महंगाई में करीब 0.7 प्रतिशत अंक की बढ़ोतरी कर सकता है। अगर इसके साथ ईंधन, डीजल, खाद और पैकेजिंग की लागत बढ़ती है, तो महंगाई पर दबाव और बढ़ सकता है।
महंगा तेल और खाद बढ़ाएंगे लागत
मध्य-पूर्व में जारी भू-राजनीतिक तनाव से ऊर्जा कीमतों में बढ़ोतरी का जोखिम भी बना हुआ है। महंगा तेल खेती और खाद्य आपूर्ति श्रृंखला की लागत बढ़ा सकता है। इसके अलावा खाद की कीमतों में बढ़ोतरी किसानों की लागत बढ़ाने के साथ खाद्य उत्पादों की कीमतों पर भी असर डाल सकती है।
भारत पर क्यों पड़ सकता है ज्यादा असर?
भारत में बड़ी आबादी की आय का हिस्सा खाद्य वस्तुओं पर खर्च होता है और कृषि क्षेत्र मानसून पर काफी निर्भर है। इसलिए कमजोर बारिश, कम कृषि उत्पादन और महंगी ऊर्जा-खाद की संयुक्त मार से खाद्य महंगाई बढ़ने का जोखिम रहता है। हालांकि, 2027 में कीमतें कितनी बढ़ेंगी, यह अभी निश्चित नहीं है और यह मानसून, वैश्विक तेल कीमतों तथा भू-राजनीतिक परिस्थितियों पर निर्भर करेगा।
