देश के टियर-2 और टियर-3 शहरों में जमीनों और मकानों की कीमतें महानगरों की तुलना में काफी रफ्तार से बढ़ रही हैं। सीआईआई और नाइट फ्रैंक इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, साल 2021 से 2026 के बीच जयपुर समेत देश के 11 प्रमुख टियर-2 शहरों में आवासीय संपत्तियों के दाम औसतन 63 प्रतिशत तक बढ़ चुके हैं। इसके मुकाबले देश के शीर्ष आठ महानगरों में यह बढ़ोतरी 42 प्रतिशत दर्ज की गई है।
जयपुर इस बदलाव के केंद्र में है। दिल्ली-एनसीआर के सबसे करीब होने, अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट की मौजूदगी और पर्यटन का बड़ा केंद्र होने के कारण यह शहर निवेशकों की पहली पसंद बनता जा रहा है। शहर के आसपास से गुजर रहे एक्सप्रेसवे और हाई-स्पीड हाईवे नेटवर्क ने इसे आवासीय और व्यावसायिक दोनों ही मोर्चों पर बड़ा रियल एस्टेट हब बना दिया है।
2047 तक 5.8 ट्रिलियन डॉलर का होगा बाजार
रिपोर्ट के अनुसार, भारत का कुल रियल एस्टेट बाजार साल 2047 तक बढ़कर 5.8 ट्रिलियन डॉलर के आंकड़े को छू सकता है। इसमें अकेले टियर-2 और टियर-3 शहरों की हिस्सेदारी 25 से 30 प्रतिशत यानी करीब 1.4 से 1.7 ट्रिलियन डॉलर तक रहने का अनुमान जताया गया है।
इस बड़े उछाल को बनाए रखने के लिए स्थानीय स्तर पर मजबूत बुनियादी ढांचे, रोजगार के साधन, विकसित भूमि बैंक, तेजी से मिलने वाली मंजूरियां और निर्बाध बिजली-पानी की आपूर्ति जरूरी होगी। सरकारी स्तर पर भी पूंजीगत खर्च में बुनियादी ढांचे की हिस्सेदारी वित्त वर्ष 2015 के 39 प्रतिशत से बढ़कर 2026 में 55 प्रतिशत हो चुकी है। वहीं सरकार की तीन साल की पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (PPP) योजना के तहत 17 लाख करोड़ रुपये की 852 परियोजनाएं पाइपलाइन में हैं।
नाइट फ्रैंक इंडिया के चेयरमैन एवं प्रबंध निदेशक शिशिर बैजल ने कहा कि देश में रियल एस्टेट की यह रफ्तार अब केवल महानगरों तक सीमित नहीं है, बल्कि टियर-2 शहरों की तरफ तेजी से फैल रही है। डेवलपर्स और निवेशकों को हर स्थानीय बाजार की वास्तविक आर्थिक ताकत को समझकर ही आगे कदम बढ़ाना होगा।
गोदामों और मॉल संस्कृति का विस्तार
सिर्फ आवासीय क्षेत्र ही नहीं, बल्कि कमर्शियल सेगमेंट में भी छोटे शहर आगे निकल रहे हैं। साल 2025 के दौरान देश के प्रमुख टियर-2 शहरों में कुल 1.12 करोड़ वर्ग फुट वेयरहाउसिंग (गोदाम) स्पेस किराए पर लिया गया। इसमें अकेले जयपुर, लखनऊ, नागपुर, इंदौर, कोयंबटूर और भुवनेश्वर की हिस्सेदारी लगभग 53 लाख वर्ग फुट यानी करीब आधी रही।
देशभर के 32 शहरों में कुल 365 शॉपिंग मॉल हैं, जिनमें से 3.6 करोड़ वर्ग फुट रीटेल स्पेस केवल 24 टियर-2 शहरों में फैला हुआ है। इस सेगमेंट में भी जयपुर समेत 10 टियर-2 शहरों की हिस्सेदारी करीब 60 प्रतिशत है। रियल एस्टेट जानकारों का कहना है कि टियर-2 शहरों में जमीनों के दाम किस तेजी से बढ़े हैं, इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि जिन इलाकों में 2011-12 के दौरान जमीन 500 रुपये प्रति गज मिलती थी, वहां आज भाव 50 हजार रुपये प्रति गज तक पहुंच चुके हैं।
