पश्चिमी राजस्थान में इस वर्ष मानसून की बेरुखी और कम बारिश के चलते उत्पन्न हुए गंभीर जल संकट और सूखे के हालात को लेकर राजनीतिक सरगर्मी बढ़ गई है। बायतु विधायक और पूर्व कैबिनेट मंत्री हरीश चौधरी ने मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर बाड़मेर, बालोतरा और जैसलमेर समेत प्रभावित इलाकों में तत्काल राहत कार्य शुरू करने की मांग की है। चौधरी ने इन क्षेत्रों में स्थिति का तुरंत सर्वे करवाकर इन्हें अकाल प्रभावित क्षेत्र घोषित करने का आग्रह किया है।
बुवाई प्रभावित और जल स्रोतों में घटता जलस्तर
पत्र में कहा गया है कि पश्चिमी राजस्थान में इस सीजन में हुई अपर्याप्त बारिश के कारण किसानों की बुवाई का काम बुरी तरह प्रभावित हुआ है। कई इलाकों में फसलें खराब होने की स्थिति बन चुकी है, जिससे ग्रामीण परिवारों और किसानों के सामने आजीविका का बड़ा संकट खड़ा हो गया है।
बारिश के अभाव में क्षेत्र के तालाब, नाड़ियां और अन्य पारंपरिक जल स्रोत सूखने की कगार पर हैं। इससे आम नागरिकों के साथ-साथ मवेशियों के लिए भी पेयजल की गंभीर समस्या पैदा हो गई है। पश्चिमी राजस्थान की बड़ी आबादी सीधे तौर पर कृषि और पशुपालन पर निर्भर है, इस वजह से इस संकट का सीधा असर ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर पड़ रहा है।
चारे और पानी को लेकर उठाई गई मांगें
विधायक ने पत्र में प्रभावित इलाकों के लिए कई प्रमुख प्रशासनिक कदम उठाने की मांग की है। इसके तहत गांवों में टैंकरों के जरिए नियमित पेयजल आपूर्ति सुनिश्चित करने और पशुओं के लिए हरे व सूखे चारे की उपलब्धता के वास्ते अनुदानित दरों पर चारा डिपो खोलने की बात कही गई है।
पशु बहुल क्षेत्रों में विशेष कैटल कैंप और पशुधन राहत शिविर शुरू करने का सुझाव दिया गया है। साथ ही, फसल नुकसान का विशेष सर्वे करवाकर प्रभावित किसानों को नियमानुसार मुआवजा देने और ग्रामीण परिवारों के लिए अकाल राहत कार्य शुरू कर रोजगार उपलब्ध कराने की मांग की गई है।
समय रहते राहत कदमों की जरूरत
हरीश चौधरी ने पत्र के अंत में कहा कि पश्चिमी राजस्थान के गांवों में हालात तेजी से चुनौतीपूर्ण होते जा रहे हैं। किसानों, पशुपालकों और ग्रामीण परिवारों को इस संकट से बचाने के लिए प्रशासन को समय रहते प्रभावी कदम उठाने होंगे। उन्होंने मुख्यमंत्री से आग्रह किया है कि संबंधित विभागों और अधिकारियों को इन जिलों में तत्काल सर्वे और राहत कार्यों के निर्देश दिए जाएं।
