अजमेर में निकाय चुनाव से ठीक पहले भाजपा के भीतर चल रही खींचतान खुलकर सामने आ गई है। पूर्व महापौर धर्मेंद्र गहलोत ने पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा देते हुए नागौर जिला प्रभारी पद छोड़ने का ऐलान कर दिया है। उन्होंने सोशल मीडिया पर वीडियो जारी कर विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी पर राजनीतिक प्रभाव का इस्तेमाल कर नोटिस भिजवाने का गंभीर आरोप लगाया है।

गहलोत ने वीडियो में खुली चुनौती देते हुए कहा है कि वह दबाव में झुकने वाले नहीं हैं और देवनानी के साथ उनकी यह राजनीतिक लड़ाई जारी रहेगी।

13 फाइलों के नक्शे पास करने से जुड़ा है पूरा मामला

यह पूरा विवाद वर्ष 2015 से 2020 और 2021 के बीच तत्कालीन निगम कमिश्नर के अवकाश पर रहने के दौरान 13 फाइलों के नक्शे पास किए जाने से जुड़ा है। इस मामले में बाद में न्यायिक जांच बिठाई गई थी, जिसमें न्यायिक विभाग ने पूर्व महापौर को दोषी माना। वर्ष 2019 में एसीबी ने भी इस मामले में जांच शुरू की थी, हालांकि तब अभियोजन स्वीकृति नहीं मिल पाई थी। अब राज्य सरकार ने एसीबी को अभियोजन स्वीकृति दे दी है।

इसी न्यायिक जांच रिपोर्ट के आधार पर स्वायत्त शासन विभाग (DLB) ने धर्मेंद्र गहलोत को नोटिस जारी किया है। विभाग ने नोटिस में पूछा है कि क्यों न राजस्थान नगर पालिका अधिनियम के तहत उन्हें छह साल के लिए चुनाव लड़ने से अयोग्य घोषित कर दिया जाए। विभाग ने इस प्रकरण में तीन दिन के भीतर स्पष्टीकरण तलब किया है।

"भारी मन से छोड़ रहा पार्टी की प्राथमिक सदस्यता"

धर्मेंद्र गहलोत ने वीडियो संदेश में कहा कि इन दोनों प्रकरणों से उनका कोई लेना-देना नहीं है। उन्होंने पार्टी के भीतर अपनी स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा कि वह भाजपा को नुकसान नहीं पहुंचाना चाहते हैं।

गहलोत ने कहा- "मैं भाजपा का सच्चा सिपाही रहा हूं। मैं नहीं चाहता कि इस विवाद से पार्टी पर कोई आंच आए या विपक्षी कांग्रेस पार्टी इसका फायदा उठाए। जब तक इन प्रकरणों का निस्तारण नहीं हो जाता, तब तक मन पर भारी पत्थर रखते हुए भाजपा की प्राथमिक सदस्यता और नागौर के प्रभारी पद से इस्तीफा देता हूं।" उन्होंने यह भी साफ किया कि उन्होंने अपना त्यागपत्र शीर्ष नेतृत्व को भेज दिया है और जल्द ही इन मामलों के सभी तथ्यों के साथ अपना पक्ष जनता के सामने रखेंगे।

वासुदेव देवनानी का पक्ष और कांग्रेस का हमला

इस पूरे घटनाक्रम पर विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी ने दो टूक प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि उनका किसी से कोई मतभेद नहीं है।

दूसरी ओर, इस राजनीतिक कलह पर कांग्रेस पार्टी ने भाजपा को घेरना शुरू कर दिया है। शहर जिला कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष डॉ. राजकुमार जयपाल ने कहा कि भाजपा अपने ही वरिष्ठ नेताओं और पूर्व जनप्रतिनिधियों को प्रताड़ित कर रही है। वहीं, पूर्व आरटीडीसी अध्यक्ष धर्मेंद्र राठौड़ और शहर कांग्रेस उपाध्यक्ष विवेक पाराशर ने भी भाजपा नेतृत्व की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए गहलोत को कानूनी और राजनीतिक रूप से समर्थन देने की बात कही है।