बॉलीवुड के महानायक अमिताभ बच्चन आज 83 साल की उम्र में भी फिल्मों में सक्रिय हैं और अपनी फिटनेस का पूरा ध्यान रखते हैं, लेकिन इस मुकाम तक पहुंचने का उनका सफर आसान नहीं रहा है। साल 1983 में फिल्म 'कुली' के सेट पर हुए एक गंभीर हादसे के दौरान उन्हें करीब 200 डोनर्स से 60 बोतल खून चढ़ाया गया था। इसी दौरान डोनर के रक्त से उनके शरीर में हेपेटाइटिस बी का वायरस पहुंच गया था, जिसका पता सालों बाद 2005 में एक रूटीन चेकअप के दौरान चला। तब तक यह वायरस उनके लिवर का 75 फीसदी हिस्सा खराब कर चुका था। आज भी बिग बी केवल 25 प्रतिशत लिवर के सहारे अपनी दिनचर्या चला रहे हैं।

सालों तक बिना लक्षणों के रहता है एक्टिव

हेपेटाइटिस बी की सबसे बड़ी चुनौती यह है कि यह संक्रमण लंबे समय तक बिना किसी स्पष्ट लक्षण के शरीर के अंदर चुपचाप पनपता रहता है। फरीदाबाद स्थित अमृता हॉस्पिटल के गैस्ट्रोएंटरोलॉजी और हेपेटोलॉजी विभाग के सीनियर कंसल्टेंट डॉ. महेंद्र सिंह राजपूत के मुताबिक, मरीज बाहर से पूरी तरह स्वस्थ और सामान्य दिखता है, जबकि अंदरूनी तौर पर लिवर लगातार क्षतिग्रस्त होता रहता है।

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के आंकड़े बताते हैं कि दुनिया भर में करोड़ों लोग क्रॉनिक हेपेटाइटिस बी के साथ जी रहे हैं। समय रहते इसकी पहचान न होने पर यह संक्रमण लिवर सिरोसिस या लिवर कैंसर जैसी गंभीर और जानलेवा स्थिति में बदल सकता है। यही वजह है कि बाहर से फिट दिखने वाले लोगों को भी नियमित अंतराल पर लिवर फंक्शन टेस्ट कराते रहना चाहिए।

लिवर की बीमारी में कसरत कितनी सही?

क्रॉनिक लिवर डिजीज के मरीजों में अक्सर 'सारकोपेनिया' की समस्या हो जाती है, जिसमें मांसपेशियां तेजी से कमजोर होने लगती हैं और गलने लगती हैं। आधुनिक मेडिकल साइंस अब ऐसे मरीजों को पूरी तरह बेड रेस्ट की बजाय डॉक्टर की निगरानी में हल्की एक्सरसाइज करने की सलाह देता है।

हाल ही में फ्रंटियर्स जर्नल में पप्रदर्शित एक रिसर्च के मुताबिक, सिरोसिस के मरीजों ने जब नियमित रूप से हल्की कसरत की, तो उनके 6 मिनट वॉक टेस्ट में करीब 54 मीटर का सुधार देखा गया। साथ ही पैरों की ताकत में भी बढ़ोतरी दर्ज की गई। हालांकि, इसका मतलब यह कतई नहीं है कि मरीज बिना डॉक्टर की सलाह के जिम में भारी वजन उठाना शुरू कर दें। कसरत का उद्देश्य बॉडीबिल्डिंग नहीं, बल्कि लिवर पर अतिरिक्त दबाव डाले बिना मांसपेशियों को बचाना है।

हेपेटाइटिस बी के मरीजों के लिए जरूरी सावधानियां

शालीमार बाग स्थित फोर्टिस हॉस्पिटल के गैस्ट्रोएंटरोलॉजी विभाग के एचओडी डॉ. रमेश गर्ग का कहना है कि इस बीमारी से निपटने के लिए निरंतर निगरानी सबसे बड़ा हथियार है।

  • नियमित जांच: डॉक्टर की सलाह के अनुसार लिवर एंजाइम, वायरल लोड और लिवर की स्थिति का समय-समय पर आंकलन कराएं।
  • दवाओं में अनुशासन: डॉक्टर द्वारा निर्धारित दवाएं बिना नागा लें। हर मरीज को तुरंत दवा की जरूरत नहीं होती, लेकिन वायरल एक्टिविटी के आधार पर समय पर इलाज शुरू करना जरूरी है।
  • लिवर को नुकसान से बचाना: बिना मेडिकल सलाह के कोई भी पेनकिलर, सप्लीमेंट्स या देसी काढ़े लेने से बचें, जो कमजोर लिवर पर भारी पड़ सकते हैं।
  • खानपान और लाइफस्टाइल: संतुलित आहार लें और वजन नियंत्रित रखें। अगर डायबिटीज या फैटी लिवर जैसी अन्य समस्याएं भी हैं, तो लाइफस्टाइल पर विशेष ध्यान देना जरूरी है।

हेपेटाइटिस बी से बचाव का सबसे अचूक और सुरक्षित जरिया वैक्सीनेशन है। डॉक्टरों का कहना है कि अमिताभ बच्चन का जीवन इस बात की मिसाल है कि सही मेडिकल निगरानी, समय पर इलाज और अनुशासित दिनचर्या के साथ गंभीर बीमारी के बावजूद सक्रिय जीवन जिया जा सकता है।